किसी की आँखों में झाँकना
उसके दर्द को खींच निकालना नहीं होता
ना ही होता है उसके मन की बात
लफ्ज़-दर-लफ्ज़ पढ़ना
उसकी गहरी नीली आँखों में
प्रेम ढूँढना तो बिलकुल भी नहीं होता
हाँ ... होते हैं कुछ अधूरे सपने उन आँखों में
देखना चाहता हूँ जिन्हें
समेटना चाहता हूँ जिनको
करना चाहता हूँ दुआ जिनके पूरे होने की
सपनों का टूट जाना
ज़िन्दगी के छिज जाने से कम नहीं ...
समेटन चाहता हूँ साँस लेती पँखुरी-पँखुरी
चाहता हूँ खिल उठे जंगली गुलाब ...
#जंगली_गुलाब