मुझे अच्छा लगेगा आपका सरकार हो जाना,
ये गलती है, तो इस गलती, का सौ-सौ बार हो जाना.
छपक छप-छप लहर के साथ सागर पार हो जाना,
इसे कहते हैं उनसे प्यार का इज़हार हो जाना.
न पूछो दिल पे कब क्या क्या शरीफ़ों के गुज़रती है,
दबे से राज़ का यूँ एक दिन अख़बार हो जाना.
हसीनों की अदा में ख़ासियत ये आम होती है,
लगे दिल झूमने तो यक-ब-यक इनकार हो जाना.
चहक उठता था हर बचपन, महक उठता था हर यौवन,
खटकता है बुजुर्गों का वहाँ दीवार हो जाना.
खिलें गुल, चूम ले तितली, गुज़र जाएँ वो इठला कर,
यही है हाँ, यही है हाँ, किसी से प्यार हो जाना.
सज़ा इस ज़िन्दगी में क्या कोई इस से बड़ी होगी,
जिसे हो भूलना उस बेवफ़ा से प्यार हो जाना.
में अपनों से तुम अपनों से लड़ो मिलना है तब मुमकिन,
मगर मुश्किल है राँझे-हीर का किरदार हो जाना.
शनिवार, 8 अगस्त 2026
शनिवार, 1 अगस्त 2026
रहना नहीं इधर न रहो पर उधर नहीं ...
उड़ लेंगे आसमान में इसकी फ़िकर नहीं,
तकलीफ़ है हमें के परिंदों के पर नहीं,
तुम हो मेरे क़रीब ज़माने का डर नही,
दुख, दर्द, धूप, छाँव का हम पर असर नहीं,
आँखों में आंसुओं का जो सैलाब है जमा,
लोगों पे आज़माना इन्हें मेरे पर नहीं,
महसूस कर सकोगे जो बैठोगे आस-पास,
शबनम की बूँद हूँ मैं दहकता शरर नहीं,
है राह शबनमी तो मैं रिश्ते भी तोड़ दूँ,
माना के हमको इश्क़ है पर इस क़दर नहीं,
इस रास्ते से हो के गुज़रते भी किस तरह,
इस रास्ते में छाँव का कोई शजर नहीं,
ये राह इसलिए भी महकती है अब तलक,
तितली परिंदे ढेर हैं लेकिन बशर नहीं,
माना वे तेरे ख़ास हैं, पर हम भी कुछ तो हैं,
रहना नहीं इधर न रहो पर उधर नहीं,
तकलीफ़ है हमें के परिंदों के पर नहीं,
तुम हो मेरे क़रीब ज़माने का डर नही,
दुख, दर्द, धूप, छाँव का हम पर असर नहीं,
आँखों में आंसुओं का जो सैलाब है जमा,
लोगों पे आज़माना इन्हें मेरे पर नहीं,
महसूस कर सकोगे जो बैठोगे आस-पास,
शबनम की बूँद हूँ मैं दहकता शरर नहीं,
है राह शबनमी तो मैं रिश्ते भी तोड़ दूँ,
माना के हमको इश्क़ है पर इस क़दर नहीं,
इस रास्ते से हो के गुज़रते भी किस तरह,
इस रास्ते में छाँव का कोई शजर नहीं,
ये राह इसलिए भी महकती है अब तलक,
तितली परिंदे ढेर हैं लेकिन बशर नहीं,
माना वे तेरे ख़ास हैं, पर हम भी कुछ तो हैं,
रहना नहीं इधर न रहो पर उधर नहीं,
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