स्वप्न मेरे: तेरी यादों से ओझल हो गया तो …

शुक्रवार, 21 अगस्त 2026

तेरी यादों से ओझल हो गया तो …

इसे पी कर मुक़म्मल हो गया तो,
में प्यासी रूह, तू जल हो गया तो.

बहाते हो जो भर-भर अश्क़ छुप कर,
ये रेगिस्तान जंगल हो गया तो.

रहेगा काम क्या लोगों पे बाक़ी,
धरम का मस’अला हल हो गया तो.

मुहब्बत में न इतने दंश देना,
कहीं ये ज़िस्म संदल हो गया तो.

मुझे तुम ओढ़ लेना सर्दियों में,
तेरी उल्फ़त में कम्बल हो गया तो.

समुंदर हो, तेरी छत, खेत चाहे,
बरस लूँगा जो बादल हो गया तो.

इसे जी लो अभी इस वक्त, है ये,
न होगा आज, पल-कल हो गया तो.

सफ़र मुश्किल न हो फिर ज़िन्दगी का,
तेरी यादों से ओझल हो गया तो.

7 टिप्‍पणियां:

  1. हेगा काम क्या लोगों पे बाक़ी,
    धरम का मस’अला हल हो गया तो.
    कटु सत्य - बेहतरीन

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  2. समय रहते समझ लिया तो अच्छा, नहीं तो फिर कुछ हाथ नहीं लगता,,,बहुत खूब कही,,,

    जवाब देंहटाएं
  3. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" पर रविवार 23 अगस्त 2026 को लिंक की गयी है....

    http://halchalwith5links.blogspot.in
    पर आप सादर आमंत्रित हैं, ज़रूर आइएगा... धन्यवाद!


    !

    आमंत्रण की सूचना में देरी के लिये क्षमा।

    जवाब देंहटाएं

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