एक मुद्दत लगी फ़साने को.
वक़्त लगता है फिर बनाने को,
एक टूटे से आशियाने को.
मसअले तो सुलझ भी जाते हैं,
कौन तैयार है भुलाने को.
तीरग़ी देख हमको है काफ़ी,
एक जुगनू तुझे मिटाने को,
उनकी यादों की आँच काफी है,
एक सिगरेट नई जलाने को.
दर्द ग़र दिल में हो तो अक्सर ही,
ज़ोर लगता है मुस्कुराने को,
चलते-चलते चलेगा सच बन कर,
झूठ लाए हैं सच छुपाने को.
वक़्त लगता है फिर बनाने को,
एक टूटे से आशियाने को.
मसअले तो सुलझ भी जाते हैं,
कौन तैयार है भुलाने को.
तीरग़ी देख हमको है काफ़ी,
एक जुगनू तुझे मिटाने को,
उनकी यादों की आँच काफी है,
एक सिगरेट नई जलाने को.
दर्द ग़र दिल में हो तो अक्सर ही,
ज़ोर लगता है मुस्कुराने को,
चलते-चलते चलेगा सच बन कर,
झूठ लाए हैं सच छुपाने को.