स्वप्न मेरे: प्रेम के नाम …

शनिवार, 14 फ़रवरी 2026

प्रेम के नाम …

मेरे तमाम जानने वालों के ख्यालों में पली
गुज़रे हुवे अनगिनत सालों की अंजान वैलेंटाइंन
हसीन यादों के कोहरे में छुपी अजनबी हसीना
समर्पित है गुलाब का वो सूखा फूल
जो बरसों क़ैद रहा डायरी के बंद पन्नों में

न तुझसे मिला, न देखा
तू कायनात में उसी दिन आई
जब एक सूखा जंगली गुलाब डायरी में मिला

मेरी तन्हाई की हमसफ़र
अनगिनत क़िस्सों की अंजान महबूबा
ख्यालों की आड़ी तिरछी रेखाओं में जब कभी
तेरा अक्स उकेरने की कोशिश करता हूँ
अनायास तेरे माथे पे बिन्दी सज़ा देता हूँ
जाने अनजाने थमा देता हूँ तेरे हाथों पूजा का थाल
फिर पलकें झुकाए सादगी भरे रूप को निहारता हूँ
मेरा जंगली गुलाब,
मेरी जानी सी अंजान प्रेमिका
तु बरसों पहले क्यों नही मिली …

6 टिप्‍पणियां:

  1. सूखा जंगली गुलाब डायरी में
    फिर भी बरसो पहले मिलने से इंकार
    वाह - बहुत सुंदर

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  2. जो न मिले उसी की तो तलाश है, जो मिल गया वह भी कहाँ मिला

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  3. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में शनिवार 21 फरवरी, 2026 को लिंक की जाएगी .... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!

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  4. जाने अनजाने थमा देता हूँ तेरे हाथों पूजा का थाल
    फिर पलकें झुकाए सादगी भरे रूप को निहारता हूँ
    क्या कहने...
    वाह!!!!

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