स्वप्न मेरे: गज़ल स्वप्नमेरे
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शनिवार, 8 अगस्त 2026

मगर मुश्किल है राँझे-हीर का किरदार हो जाना ...

मुझे अच्छा लगेगा आपका सरकार हो जाना,
ये गलती है, तो इस गलती, का सौ-सौ बार हो जाना.

छपक छप-छप लहर के साथ सागर पार हो जाना,
इसे कहते हैं उनसे प्यार का इज़हार हो जाना.

न पूछो दिल पे कब क्या क्या शरीफ़ों के गुज़रती है,
दबे से राज़ का यूँ एक दिन अख़बार हो जाना.

हसीनों की अदा में ख़ासियत ये आम होती है,
लगे दिल झूमने तो यक-ब-यक इनकार हो जाना.

चहक उठता था हर बचपन, महक उठता था हर यौवन,
खटकता है बुजुर्गों का वहाँ दीवार हो जाना.

खिलें गुल, चूम ले तितली, गुज़र जाएँ वो इठला कर,
यही है हाँ, यही है हाँ, किसी से प्यार हो जाना.

सज़ा इस ज़िन्दगी में क्या कोई इस से बड़ी होगी,
जिसे हो भूलना उस बेवफ़ा से प्यार हो जाना.

में अपनों से तुम अपनों से लड़ो मिलना है तब मुमकिन,
मगर मुश्किल है राँझे-हीर का किरदार हो जाना.