अजीब शख़्स है कहता है जा नहीं देता,
है साझे-दार मेरा पर नफ़ा नहीं देता.
किसी की याद में कब-तक गुज़ार लेगा दिन,
हुआ है इश्क़ तो फिर क्यों बता नहीं देता.
उदासियों की सिलाई उधेड़ दूँ लेकिन,
वो दिल के दर्द का अपने सिरा नहीं देता.
नहीं रहेगा ये जुगनू भी जुगनुओं जैसे,
चिराग दश्त के जब-तक बुझा नहीं देता.
दुआ तो रोज़ ही करता है ठीक होने की,
मरीज़ ठीक हो कैसे दवा नहीं देता.
में घर में घुस भी नहीं सकता हूँ अभी जब-तक,
मकान की वो मेरे छत बना नहीं देता.
सृजन का बीज पनपता है ख़ुद कि मेहनत से,
ये वक़्त यूँ ही खनिज जल हवा नहीं देता.
वाह
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