स्वप्न मेरे: ऐसे ही दाग चेहरे के स्वीकार कीजिए …

शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026

ऐसे ही दाग चेहरे के स्वीकार कीजिए …

करना है ग़र तो आप इसे इनकार कीजिए,
वर्ना हमारी बात से इक़रार कीजिए.

अच्छी लगे जो बात हमारी तो यूँ करें,
अख़बार इस ग़ज़ल को लगातार कीजिए.

महफ़िल में इतने लोग हैं जिनसे मिले न दिल,
बस दूर दूर से ही नमस्कार कीजिए.

छोटी सही मगर वो सकारात्मक तो हो,
फिर मिल के इस विचार का विस्तार कीजिए.

क्यों बीच राह आपने रोका है नाव को,
इस पार कीजिए या तो उस-पार कीजिए.

बारूद के जो पेड़ उग आए हैं खेत में,
हो सकता है तो उनका भी उपचार कीजिए.

डिम्पल हो, तिल हो, जो भी हो उसका महत्व है,
ऐसे ही दाग चेहरे के स्वीकार कीजिए

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