स्वप्न मेरे: यहाँ सर्दियों का गुलाबी है मौसम …

शनिवार, 3 अक्टूबर 2026

यहाँ सर्दियों का गुलाबी है मौसम …

पहाड़ों ने थामा है सर्दी का परचम,
फ़िज़ाओं में कोहरे की बजती है सरगम.

डिनर सुरमई अब्र पर बुक है अपना,
परिंदों के पर पे चलें बैठ के हम.

वहीं चाँदनी सो रही मस्त हो के,
जहाँ बर्फ़ की है रज़ाई मुलायम.

हवा सर्द मौसम के नश्तर हों जैसे,
खिली धूप जैसे के जाड़ों की मरहम.

चिनारों पे फ़ुर्क़त के लम्हे मिलेंगे,
सुलगते हैं यादों की सिगड़ी में तुम-हम.

चहकने लगे कुछ रिबन आसमानी,
हरी पत्तियों पर गिरी यूँ ही शबनम.

न जाड़ों में ठंडी, न गर्मी गरम हो,
ख़ुदा मान जाए तो बदले ये सिस्टम.

शटर दिन का खुलने पे दिखने लगा है,
यहाँ सर्दियों का गुलाबी है मौसम.
(तरही ग़ज़ल)

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है