गुरुवार, 25 नवंबर 2021
मंगलवार, 16 नवंबर 2021
ऊंघ रही हैं बोझिल पलकें और उबासी सोफे पर
धूप छुपी मौसम बदला फिर लिफ्ट मिल गई मौके पर.
कतरा-कतरा शाम पिघलती देखेंगे चल छज्जे पर.
तेरे जाते ही पसरी है एक उदासी कमरे पर,
सीलन-सीलन दीवारों पर सिसकी-सिसकी कोने पर.
मद्धम-मद्धम चाँद का टैरस घूँट-घूँट कौफी का टश,
पैदल-पैदल मैं आता हूँ तू बादल के टुकड़े पर.
लम्हा-लम्हा इश्क़ बसंती कर देता है फिजाँ-फिजाँ,
गुलशन-गुलशन फूल खिले है इक तितली के बोसे पर.
चुभती हैं रह-रह कर एड़ी पर कुछ यादें कीलों सी,
धूल अभी तक तन्हा-तन्हा जमी हुई है जूते पर.
ठहरा-ठहरा शाम का लम्हा छपा हुआ है गाड़ा सा,
ताज़ा-ताज़ा होठ मिलेंगे फिर कौफी के मग्गे पर.
ठक-ठक, खट-खट, घन्टी-घन्टी गेट खड़कता रहता है,
ऊंघ रही हैं बोझिल पलकें और उबासी सोफे पर.
मंगलवार, 9 नवंबर 2021
यूँ पाँव पाँव चल के तो जाए न जाएँगे ...
खुल कर तो आस्तीन
में पाए न जाएँगे.
इलज़ाम दोस्तों पे
लगाए न जाएँगे.
सदियों से
पीढ़ियों ने जो बाँधी हैं बेड़ियाँ,
इस दिल पे उनके
बोझ उठाए न जाएँगे.
अब मौत ही करे तो
करे फैंसला कोई,
खुद चल के इस
जहान से जाए न जाएँगे.
अच्छा है डायरी
में सफों की कमी नहीं,
वरना तो इतने राज़
छुपाए न जाएँगे.
सुलगे हैं वक़्त
की जो रगड़ खा के मुद्दतों,
फूकों से वो चराग़
बुझाए न जाएँगे.
अब वक़्त कुछ हिसाब
करे तो मिले सुकूँ,
दिल से तो इतने
घाव मिटाए न जाएँगे.
इतनी पिलाओगे जो
नज़र की ये शोखियाँ,
यूँ पाँव पाँव चल
के तो जाए न जाएँगे.
बुधवार, 27 अक्टूबर 2021
शेर बोली पर हैं मिसरे बेचता हूँ ...
टोपियें, हथियार, झण्डे बेचता हूँ.
चौंक पे हर बार झगड़े बेचता हूँ.
इस तरफ हो उस तरफ ... की फर्क यारा,
हर किसी को मैं तमंचे बेचता हूँ.
सच खबर ... अफवाह झूठी ... या मसाला,
थोक में हरबार ख़बरें बेचता हूँ.
चाँदनी पे वर्क चाँदी का चढ़ा कर,
एक सौदागर हूँ सपने बेचता हूँ.
पक्ष वाले ... सुन विपक्षी ... तू भी ले जा,
आइनों के साथ मुखड़े बेचता हूँ.
खींच कर बारूद की सीमा ज़मीं पर,
खून से लथपथ में नक़्शे बेचता हूँ.
दी सिफत लिखने की पर फिर भूख क्यों दी,
शेर बोली पर हैं मिसरे बेचता हूँ.
शनिवार, 9 अक्टूबर 2021
चलो बूँदा-बाँदी को बरसात कर लें
कहीं दिन गुजारें, कहीं रात कर लें.
कभी खुद भी खुद से मुलाक़ात कर लें.
बुढ़ापा है यूँ भी तिरस्कार होगा,
चलो साथ बच्चों के उत्पात कर लें.
ज़रूरी नहीं है जुबानें समझना,
इशारों इशारों में कुछ बात कर लें.
मिले डूबते को बचाने का मौका,
कभी हम जो तिनके सी औकात कर लें.
न जज हम करें, न करें वो हमें जज,
भरोसा रहे ऐसे हालात कर लें.
ये बस दोस्ती में ही मुमकिन है यारों,
बिना सोचे समझे हर इक बात कर लें.
दिखाना मना है जो दुनिया को आँसू,
चलो बूँदा-बाँदी को बरसात कर लें.
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