स्वप्न मेरे: बरसात
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शनिवार, 9 अक्टूबर 2021

चलो बूँदा-बाँदी को बरसात कर लें

कहीं दिन गुजारें, कहीं रात कर लें.
कभी खुद भी खुद से मुलाक़ात कर लें.
 
बुढ़ापा है यूँ भी तिरस्कार होगा,
चलो साथ बच्चों के उत्पात कर लें.
 
ज़रूरी नहीं है जुबानें समझना,
इशारों इशारों में कुछ बात कर लें.
 
मिले डूबते को बचाने का मौका,
कभी हम जो तिनके सी औकात कर लें.
 
न जज हम करें, न करें वो हमें जज,
भरोसा रहे ऐसे हालात कर लें.
 
ये बस दोस्ती में ही मुमकिन है यारों,
बिना सोचे समझे हर इक बात कर लें.
 
दिखाना मना है जो दुनिया को आँसू,
चलो बूँदा-बाँदी को बरसात कर लें.

मंगलवार, 2 फ़रवरी 2021

कैसे कह दूँ की अब घात होगी नही ...

तुम झुकोगे नहीं बात होगी नही.
ज़िन्दगी भर मुलाक़ात होगी नही.
 
थाम लो हाथ किस्मत से मिलता है ये,
उम्र भर फिर ये सौगात होगी नही.
 
आज मौका मिला है तो दामन भरो,
फिर ये खुशियों की बरात होगी नहीं.
 
धूप ने है बनाया अँधेरों में घर,
देखना अब कभी रात होगी नही.
 
दिल में नफरत के दीपक जो जलते रहे,  
मीठे पानी की बरसात होगी नही.
 
सच के साहस के आगे टिके रह सके,
झूठ की इतनी औकात होगी नही.
 
घर के बाहर है दुश्मन तो अन्दर भी है,
कैसे कह दूँ की अब घात होगी नही.

बुधवार, 26 अक्टूबर 2016

हम भी किसी हसीन की आहों में आ गए ...

कुछ यूँ फिसल के वो मेरी बाहों में आ गए 
ना चाहते हुए भी निगाहों में आ गए

सच की तलाश थी में अकेला निकल पड़ा
जुड़ते रहे थे लोग जो राहों में आ गए 

हम भीगने को प्रेम की बरसात में सनम
कुछ देर बादलों की पनाहों में आ गए

था प्रेम उनसे उनके लगे झूठ सच सभी
ना चाह कर भी उनके गुनाहों में आ गए

मशहूर हो गया है हमारा भी नाम अब
हम भी किसी हसीन की आहों में आ गए