मैं
रंग मुहब्बत का, थोड़ा सा लगा दूँ तो.
ये
मांग तेरी जाना, तारों से सज़ा दूँ तो.
तुम इश्क़ की गलियों से, निकलोगे भला कैसे,
मैं
दिल में अगर सोए, अरमान जगा दूँ तो.
उलफ़त
के परिंदे तो, मर जाएंगे ग़श खा कर,
मैं
रात के आँचल से, चंदा को उड़ा दूँ तो.
मेरी
तो इबादत है, पर तेरी मुहब्बत है,
ये
राज भरी महफ़िल, में सब को बता दूँ तो.
लहरों
का सुलग उठना, मुश्किल भी नहीं इतना,
ये
ख़त जो अगर तेरे, सागर में बहा दूँ तो.
कुछ
फूल मुहब्बत के, मुमकिन है के खिल जायें,
यादों
के पिटारे से, इक लम्हा गिरा दूँ तो.
(तरही ग़ज़ल)