स्वप्न मेरे: दो-चार बात कर के जो तेरा नहीं हुआ ...

शुक्रवार, 24 दिसंबर 2021

दो-चार बात कर के जो तेरा नहीं हुआ ...

यूँ तो तमाम रात अँधेरा नहीं हुआ.
फिर क्या हुआ के आज सवेरा नहीं हुआ.
 
धड़कन किसी का नाम सजा देगी खुद-ब-खुद,
दिल पर किसी का नाम उकेरा नहीं हुआ.
 
हर हद करी है पार फ़कत जिसके नाम पर,
बस वो निगाहें यार ही मेरा नहीं हुआ.
 
मिल कर सभी से देख लिया ज़िन्दगी में अब,
है कौन जिसको इश्क़ ने घेरा नहीं हुआ.
 
लाली किसी के इश्क़ की उतरी है गाल पर,
चेहरे पे बस गुलाल बिखेरा नहीं हुआ.
 
उनको न ढब, समझ, न सलीका, न कुछ शऊर,
दो-चार बात कर के जो तेरा नहीं हुआ.

28 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत खूब हर शेर मुकम्मल हर शेर लाजवाब।

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  2. आपकी हर ग़ज़ल लाजबाव होती है

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  3. सादर नमस्कार ,

    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार(26-12-21) को क्रिसमस-डे"(चर्चा अंक4290)पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है..आप की उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ायेगी .
    --
    कामिनी सिन्हा

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  4. वाह्ह... बेहतरीन गज़ल सर।
    सादर।

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  5. बहुत ख़ूब !
    हम तो आपके और आपकी शायरी के हो गए जनाब !

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  6. हर हद करी है पार फ़कत जिसके नाम पर,
    बस वो निगाहें यार ही मेरा नहीं हुआ.
    हमेशा की तरह लाजवाब गजल..
    एक से बढ़कर एक शेर
    वाह!!!

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  7. उनको न ढब, समझ, न सलीका, न कुछ शऊर,
    दो-चार बात कर के जो तेरा नहीं हुआ.. नायाब शेरों से सज्जित बेहतरीन गजल ।

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  8. हर हद करी है पार फ़कत जिसके नाम पर,
    बस वो निगाहें यार ही मेरा नहीं हुआ.

    व्यथित एहसास को व्यक्त करती पंक्तियाँ।
    हर पंक्ति लाजवाब

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  9. नमस्ते!👏!
    यात्रा पर रहने और आज नेटवर्क उपलब्ध होने के कारण मैं आज रचनाओं को देख पा रहा हूँ।
    आपकी गजलें बहुत अच्छी हैं।
    हर हद करी है पर फकत जिसके नाम पर!
    वाह! --ब्रजेंद्रनाथ

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  10. मिल कर सभी से देख लिया ज़िन्दगी में अब,
    है कौन जिसको इश्क़ ने घेरा नहीं हुआ.
    ----------------
    उनको न ढब, समझ, न सलीका, न कुछ शऊर,
    दो-चार बात कर के जो तेरा नहीं हुआ.

    इश्‍क से दो-चार सभी होते ही हैं, गर कुछ सामने होते है तो कुछ पीछे नजर आते हैं
    सच है जिसेे इश्‍क की समझ नहीं, उसका इश्‍क-इश्‍क कहांं होगा

    बहुत ही सुन्‍दर गजल

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  11. इतनी सुंदर ग़ज़ल है कि बार बार पढ़ी।
    दो पंक्तियाँ मेरी तरफ से -
    घर हो के हो दरख्त, सबसे दर-ब-दर हुई,
    'चिड़िया' के नाम कोई बसेरा नहीं हुआ।

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  12. धड़कन किसी का नाम सजा देगी खुद-ब-खुद,
    दिल पर किसी का नाम उकेरा नहीं हुआ.

    हर हद करी है पार फ़कत जिसके नाम पर,
    बस वो निगाहें यार ही मेरा नहीं हुआ.
    माशाअल्लाह! आफरीन! आफ़रीन!!!!!!👍👌👌👌🙏🙏

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  13. यूँ तो तमाम रात अँधेरा नहीं हुआ.
    फिर क्या हुआ के आज सवेरा नहीं हुआ
    बेहतरीन भावों की बेहतरीन अभिव्यक्ति ।

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  14. सच में बहुत अच्छा लगा कि आपने इश्क़ के उस अनकहे दर्द को इतनी नज़ाकत और सरलता से पेश किया। सच कहूँ तो पढ़ते हुए मुझे लगा कि कभी-कभी प्यार में जो कुछ नहीं होता, वही सबसे बड़ी गहराई छोड़ जाता है। आपकी कलम सच में जादूगर है, और मुझे यकीन है कि हर शायर-दोस्त इसे पढ़कर मुस्कुराएगा और अपने दिल में महसूस करेगा।

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