धूप की बैसाखियों
को भूल जा
दिल में हिम्मत
रख दियों को भूल जा
व्यर्थ की
नौटंकियों को भूल जा
मीडिया की
सुर्ख़ियों को भूल जा
उस तरफ जाती हैं तो
आती नहीं
इस नदी की
कश्तियों को भूल जा
टिमटिमा कर फिर
नज़र आते नहीं
रास्ते के
जुगनुओं को भूल जा
हो गईं तो हो गईं
ले ले सबक
जिंदगी की
गलतियों को भूल जा
याद रख्खोगे तो
मांगोगे सबब
कर के सारी
नेकियों को भूल जा
रंग फूलों के
चुरा लेती हैं ये
इस चमन की
तितलियों को भूल जा
टूट कर आवाज़ करती
हैं बहुत
तू खिजाँ की
पत्तियों को भूल जा
इस शहर से उस शहर
कितने शहर
आसमानी पंछियों
को भूल जा