पल पहली मुहब्बत का भुलाया नहीं जाता.
ख़त यूँ ही दराज़ों में छुपाया नहीं जाता.
जंगल में कई मेमने यह पूछ रहे हैं,
क्यों घास कभी शेर से खाया नहीं जाता.
मुमकिन है मुझे भेजा हो पैग़ाम किसी न,
बे-बात कबूतर यूँ उड़ाया नहीं जाता.
पाना है जो छुटकारा ज़रूरी हैं अंधेरे,
इस धूप में तो जिस्म से साया नहीं जाता.
उगते हैं जो गमलों में सभी पूछ रहे हैं,
क्यों गमले में जामुन को लगाया नहीं जाता.
माना के डिनर बुक है मगर छोड़ के उनको,
यूँ चाँद की टैरस पे तो जाया नहीं जाता.
आ चल के कहीं ढूँढ लें पशुओं में मिले तो,
इंसानों में इंसान तो पाया नहीं जाता.
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शनिवार, 30 मई 2026
सोमवार, 25 मार्च 2019
अरे “शिट” आखरी सिगरेट भी पी ली ...
सुनों छोड़ो चलो
अब उठ भी जाएँ
कहीं बारिश से
पहले घूम आएँ
यकीनन आज फिर इतवार होगा
उनीन्दा दिन है, बोझिल सी हवाएँ
हवेली तो नहीं पर
पेड़ होंगे
चलो जामुन वहाँ
से तोड़ लाएँ
नज़र भर हर नज़र
देखेगी तुमको
कहीं काला सा इक
टीका लगाएँ
पतंगें तो उड़ा
आया है बचपन
चलो पिंजरे से अब
पंछी उड़ाएँ
कहरवा दादरा की ताल
बारिश
चलो इस ताल से हम
सुर मिलाएँ
अरे “शिट” आखरी
सिगरेट भी पी ली
ये बोझिल रात अब
कैसे बिताएँ
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