स्वप्न मेरे: कारवाँ
कारवाँ लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
कारवाँ लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

मंगलवार, 30 अप्रैल 2024

विश्वास ...

तूफान के साथ सब कुछ उजड़ गया सिवाए प्रेम के
पूरब की किरणों के साथ लौटने लगी घास, खिलने लगे फूल
लौट आया सफ़ेद बादलों का कारवाँ

इन्द्र-धनुष के रंग भी खिलने लगे समय के साथ
कितना जरूरी है प्रेम और प्रेम पर विश्वास होना

सोमवार, 12 सितंबर 2016

क्यों खड़े कर दिए मकाँ इतने ...

दिख रहे ज़ुल्म के निशाँ इतने
लोग फिर भी हैं बे-जुबां इतने

एक प्याऊ है बूढ़े बाबा का
लोग झुकते हैं क्यों वहाँ इतने

सुख का साया न दुःख के बादल हैं
पार कर आए हैं जहाँ इतने

घूम के लौटती हैं ये सडकें
जा रहे फिर भी कारवाँ इतने

माँ मेरे साथ साथ रहती है
किसको मिलते हैं आसमाँ इतने

दिल किसी का धड़क नहीं पाया
पत्थरों के थे आशियाँ इतने

ख़ाक तो ख़ाक में ही मिलनी है
क्यों खड़े कर दिए मकाँ इतने