स्वप्न मेरे: दिल में छुपा है इश्क़ जो कैसे बताओगे ...

सोमवार, 29 जून 2026

दिल में छुपा है इश्क़ जो कैसे बताओगे ...

तुम धूप का लिबास पहन कर जो आओगे.
मुमकिन है तीरग़ी से कभी मिल न पाओगे.

कश-कश के साथ तुमको भी पी लूँगा सोच लो,
हमको जो एक बार भी सिगरेट पिलाओगे.

आसान आसमान पे उनको है टाँकना,
पर ये बताओ चाँद को कब तक हटाओगे.

पूरा करो के तोड़ दो कोशिश तो पर करो,
वादा किया है खुद से तो कब तक निभाओगे.

उतरो के दो-दो हाथ समुंदर से भी करो,
चप्पू बताओ रेत में कब तक चलाओगे.

इज़हार अपना इश्क़ न करने में देर हो,
दिन-रात उनकी याद में वरना बिताओगे.

पहचानी रह-गुजर पे भी मंज़िल का है पता,
सम्मान होगा राह जो अपनी बनाओगे.

नाक़ामियों से उलझे रहोगे जो देर तक,
तुम क़द को कैसे अपने शिखर तक उठाओगे.

खुल कर तो बात बोलना अब तक न आ सका,
दिल में छुपा है इश्क़ जो कैसे बताओगे.

9 टिप्‍पणियां:

  1. जब कोई यूँ पूछेगा ... उत्तर क्या मौन रहेगा ?
    शानदार रचना

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  2. वाह!! ज़िंदगी से जुड़े खूबसूरत अश्यार

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  3. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" बुधवार 1 जुलाई 2026 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  4. वाह !! लाजवाब सृजन ..,अति सुन्दर ।

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  5. आपकी यह ग़ज़ल 'इश्क़ की रुमानियत' और 'ज़िंदगी के फलसफे' का एक बेहतरीन संतुलन है। भाषा सरल लेकिन मायने बहुत गहरे, जैसे-'रेत में चप्पू चलाना', 'धूप का लिबास' और 'आसमान पर टाँकना' जैसे प्रयोग आपकी कल्पनाशीलता को बहुत ऊँचे दर्जे पर ले जाती है, जो बहुत कुछ सोचने पर मजबूर करते हुए सीधे दिल को छूती है।

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  6. नाक़ामियों से उलझे रहोगे जो देर तक,
    तुम क़द को कैसे अपने शिखर तक उठाओगे.
    वाह!!!
    हर शेर चिंतनपरक
    बहुत ही लाजवाब🙏🙏

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आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है