पोल ऐसे ही खोल देता है.
वो कहीं कुछ भी बोल देता है.
सोच लो कम-से-कम है क्या क़ीमत,
वो तो कोड़ी का मोल देता है.
टू-द-पॉइंट जवाब दूँ कैसे,
प्रश्न जब गोल-गोल देता है.
कौन सी चैट है ख़ुदा जाने,
लोल के बदले लोल देता है.
वो मदारी है विष फ़िज़ाओं में,
लफ़्ज़-दर-लफ़्ज़ घोल देता है.
वो प्रजातंत्र का है निर्देशक,
चुप ही रहने का रोल देता है.
है तो मुश्किल मगर वो दुख ले कर,
कह-कहे फ्री में तोल देता है.
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