स्वप्न मेरे: कैसे कहेंगे उसको वो बे-रोज़गार है …

बुधवार, 24 जून 2026

कैसे कहेंगे उसको वो बे-रोज़गार है …

दीवार है जो बीच की उसमें दरार है.
कंधों पे अब इस छत का भी दारोमदार है.

किस बात का बताओ तुम्हें इंतज़ार है.
अब हो गया तो बोल भी दो हमसे प्यार है.

जिसकी नहीं कलम से कभी दोस्ती हुई,
कहते हैं वो भी एक उपन्यासकार है.

क़ानून सिर्फ़ एक है क़ानून कुछ नहीं,
जंगल का फिर भी हाल मगर शानदार है.

पैसा अगर हो पास तो जितनी बुराई हो,
बच्चा रईस बाप का भी होनहार है.

सच है के उसके दिल को नहीं जान पाएगा,
माना तमाम ग्रंथों का वो जानकार है.

मोहलत मिली न इश्क़ से आठों पहर जिसे,
कैसे कहेंगे उसको वो बे-रोज़गार है.

1 टिप्पणी:

आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है