तुम धूप का लिबास पहन कर जो आओगे.
मुमकिन है तीरग़ी से कभी मिल न पाओगे.
कश-कश के साथ तुमको भी पी लूँगा सोच लो,
हमको जो एक बार भी सिगरेट पिलाओगे.
आसान आसमान पे उनको है टाँकना,
पर ये बताओ चाँद को कब तक हटाओगे.
पूरा करो के तोड़ दो कोशिश तो पर करो,
वादा किया है खुद से तो कब तक निभाओगे.
उतरो के दो-दो हाथ समुंदर से भी करो,
चप्पू बताओ रेत में कब तक चलाओगे.
इज़हार अपना इश्क़ न करने में देर हो,
दिन-रात उनकी याद में वरना बिताओगे.
पहचानी रह-गुजर पे भी मंज़िल का है पता,
सम्मान होगा राह जो अपनी बनाओगे.
नाक़ामियों से उलझे रहोगे जो देर तक,
तुम क़द को कैसे अपने शिखर तक उठाओगे.
खुल कर तो बात बोलना अब तक न आ सका,
दिल में छुपा है इश्क़ जो कैसे बताओगे.
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