स्वप्न मेरे: कान्हा
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शुक्रवार, 12 सितंबर 2025

कान्हा - एक ग़ज़ल

 मेरी एक ग़ज़ल वर्षा जी की आवाज़ में … वर्षा जी रायपुर की रहने वाली हैं और बहुत ही कमाल की आवाज़ है उनकी … 

बहुत आभार वर्षा जी का इस कान्हा को समर्पित ग़ज़ल को आवाज़ देने के लिए … 

पाँव कान्हा के छू कर विहल हो गए 

माता यमुना के तेवर प्रबल हो गए 

सौ की मर्यादा टूटी सुदर्शन चला 

पल वो शिशुपाल के काल-पल हो गए 

राधे-राधे जपा हो गई तब कृपा 

कुंज गलियन में जीवन सफल हो गए



सोमवार, 3 सितंबर 2018

कर्म का उपदेश कान्हा नाम है ...

सभी की श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक बधाई ... कान्हा की कृपा सभी पर बनी रहे ...

इस मुई मुरली को कब विश्राम है
है जहां राधा वहीं घनश्याम है 

बाल यौवन द्वारका के धीश हों 
नन्द लल्ला को कहाँ आराम है 

हाथ तो पहुँचे नहीं छींके तलक
गोप माखन चोर बस बदनाम है 

पूछ कर देखो बिहारी लाल से
है जहां पर प्रेम वो ब्रज-धाम है 

रास हो बस रास हो गोपाल संग
गोपियों का घर कोई ग्राम है 

हे कन्हैया शरण में ले लो मुझ
तू ही मेरा कृष्ण तू ही राम है 

धर्म पथ पर ना कभी विचलित हुए 
कर्म का उपदेश कान्हा नाम है

सोमवार, 12 दिसंबर 2016

होले-होले बजती हो, बांसुरी कोई जैसे ...

रात के अँधेरे में, धूप हो खिली जैसे
यूँ लगे है कान्हा ने, रास हो रची जैसे

ज़ुल्फ़ की घटा ओढ़े, चाँद जैसे मुखड़े पर
बादलों के पहरे में, चांदनी सोई जैसे

सिलसिला है यादों का, या धमक क़दमों की
होले-होले बजती हो, बांसुरी कोई जैसे

चूड़ियों की खन-खन में, पायलों की रुन-झुन में
घर के छोटे आँगन में, जिंदगी बसी जैसे

यूँ तेरा अचानक ही, घर मेरे चली आना
दिल के इस मोहल्ले में आ गयी ख़ुशी जैसे
(तरही गज़ल)