स्वप्न मेरे: घरोंदे
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सोमवार, 1 अप्रैल 2019

शर्ट के टूटे बटन में रह गए ...


प्रेम के कुछ दाग तन में रह गए
इसलिए हम अंजुमन में रह गए

सब तो डूबे चुस्कियों में और हम
नर्म सी तेरी छुवन में रह गए

चल दिए कुछ लोग रिश्ता तोड़ कर
कुछ निभाने की जतन में रह गए

छा गए किरदार कुछ आकाश पर
कुछ सिमट के पैरहन में रह गए

टूट कर सपने नहीं आए कभी 
कुछ गुबारे भी गगन में रह गए

अहमियत रिश्तों की कुछ समझी नहीं
अपने अपने ही बदन में रह गए

उड़ गई आंधी घरोंदे तोड़ कर 
सिरफिरे फिर भी चमन में रह गए

रेशमी धागे, मधुर एहसास, पल
शर्ट के टूटे बटन में रह गए

खिडकियों से आ गई ताज़ा हवा
हम मगर फिर भी घुटन में रह गए