कैसे कह दूँ की अब घात होगी नही ...
तुम झुकोगे नहीं बात होगी नही.
ज़िन्दगी भर मुलाक़ात होगी नही.
थाम लो हाथ किस्मत से मिलता है ये,
उम्र भर फिर ये सौगात होगी नही.
आज मौका मिला है तो दामन भरो,
फिर ये खुशियों की बरात होगी नहीं.
धूप ने है बनाया अँधेरों में घर,
देखना अब कभी रात होगी नही.
दिल में नफरत के दीपक जो जलते रहे,
मीठे पानी की बरसात होगी नही.
सच के साहस के आगे टिके रह सके,
झूठ की इतनी औकात होगी नही.
घर के बाहर है दुश्मन तो अन्दर भी है,
कैसे कह दूँ की अब घात होगी नही.
सच के साहस के आगे टिके रह सके,
जवाब देंहटाएंझूठ की इतनी औकात होगी नही....
सुंदर ग़ज़ल...
बहुत सुंदर सार्थक भाव लिए उमर्दा ग़ज़ल
जवाब देंहटाएंबहुत खूब जनाब!
जवाब देंहटाएंवाह
जवाब देंहटाएंबहुत बहुत सुन्दर प्रशंसनीय गजल
जवाब देंहटाएंघर के बाहर है दुश्मन तो अन्दर भी है,
जवाब देंहटाएंकैसे कह दूँ की अब घात होगी नही.
बहुत खूब !! अत्यंत सुन्दर ग़ज़ल ।
आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" ( 2028...कलेंडर पत्र-पत्रिकाओं में सिमट गया बसंत...) पर गुरुवार 04 फ़रवरी 2021 को साझा की गयी है.... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!
जवाब देंहटाएंआज मौका मिला है तो दामन भरो,
जवाब देंहटाएंफिर ये खुशियों की बरात होगी नहीं.
वाकई जिंदगी एक बार मौका देती है उसे चूकना नहीं चाहिए, सुंदर भावपूर्ण रचना !
बहुत ही सुंदर सृजन।
जवाब देंहटाएंबहुत सुन्दर
जवाब देंहटाएंजी नमस्ते ,
जवाब देंहटाएंआपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल गुरुवार (०४-०२-२०२१) को 'जन्मदिन पर' (चर्चा अंक-३९६७) पर भी होगी।
आप भी सादर आमंत्रित है।
--
अनीता सैनी
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
जवाब देंहटाएंधूप ने है बनाया अँधेरों में घर,
जवाब देंहटाएंदेखना अब कभी रात होगी नही.
बहुत खूब,लाजबाब हमेशा की तरह सादर नमन आपको
वर्तमान परिपेक्ष्य में रची गयी बेहतरीन ग़ज़ल।
जवाब देंहटाएंघर के बाहर है दुश्मन तो अन्दर भी है, कैसे कह दूँ की अब घात होगी नही''
जवाब देंहटाएंसार्थक अभिव्यक्ति
तुम झुकोगे नहीं बात होगी नही.
जवाब देंहटाएंज़िन्दगी भर मुलाक़ात होगी नही...
शुरूआत ही बहुत खूब है ! सारे शेर लाजवाब।
धूप ने है बनाया अँधेरों में घर,
देखना अब कभी रात होगी नही..
ये मुझे बहुत पसंद आया।
बहुत ख़ूब कहा है--
जवाब देंहटाएंतुम झुकोगे नहीं बात होगी नही.
दिल में नफरत के दीपक जो जलते रहे,
जवाब देंहटाएंमीठे पानी की बरसात होगी नही.
बहुत ही शानदार और व्यवहारिक ग़ज़ल
बहुत सुंदर एवं भावपूर्ण रचना ।
जवाब देंहटाएं
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