बहरों का है शहर ये संभल जाइए हुजूर
क्यों कह रहे हैं अपनी गज़ल जाइए हुजूर
बिखरे हुए जो राह में पत्थर समेट
लो
कुछ दूर कांच का है महल जाइए हुजूर
जो आपकी तलाश समुन्दर पे ख़त्म है
दरिया के साथ साथ निकल जाइए हुजूर
क्यों बात बात पर हो ज़माने को कोसते
अब भी समय है आप बदल जाइए हुज़ूर
मुद्दों की बात पर न कभी साथ आ सके
अब देश पे बनी है तो मिल जाइए हुजूर
हड्डी गले की बन के अटक जाएगी कभी
छोटी सी मछलियां हैं निगल जाइए हुजूर
बूढ़ी हुई तो क्या है उठा लेगी गोद में
माँ सामने खड़ी है मचल जाइए हुजूर
8EE2E90796
जवाब देंहटाएंmmorpg oyunlar
Evde Paketleme İşi
En İyi Takipçi
Takipçi Fiyatları
Güvenilir Takipçi
91589D36
जवाब देंहटाएंKastamonu
Kars
Bingöl
Yalova
Kırıkkale
Siirt
Bitlis
Sinop
Tekirdağ
33E1A8CA
जवाब देंहटाएंKars
Muş
Çanakkale
Kilis
Sivas
Trabzon
Artvin
Maraş
Osmaniye