जीवन का सफ़र हमने, तन्हा न चुना होता.
कुछ उनकी सुनी होती, कुछ अपना कहा होता.
इक बार सनम लब से डाली को छुआ होता.
मुमकिन है के पतझड़ में, पत्ता न जुदा होता.
यह बात हवाई है, यह सोच ख़याली है,
जब ऐसे किया होता, तब ऐसा हुआ होता.
आकाश के सब तारे घर भर में सजा देते,
कुछ रोज़ मेरे घर भी चंदा जो रुका होता.
कुछ साथ गुज़र जाते, कुछ याद में कट जाते,
चुप रह के तेरी बातों को हमने सुना होता.
हम तो न सही लेकिन, दो चार अटक जाते,
उल्फ़त का जो फिर तुमने, इक जाल बुना होता.
इनको तो ये तितली ही, चुन-चुन के मसल देती,
काँटों की हिफ़ाज़त में, ग़र गुल न उगा होता.
वाह
जवाब देंहटाएंबहुत खूब, ये ग़ज़ल दिल के बहुत करीब लगती है। आपने “क्या होता अगर” वाली फीलिंग को बहुत खूबसूरती से पकड़ा है। हर शेर में एक हल्का सा अफसोस है, पर वही इसे खास बनाता है। मुझे लगा जैसे कोई अपने बीते पलों को याद करते हुए खुद से बात कर रहा हो।
जवाब देंहटाएंशब्दों को चाशनी में परोसना आप से बेहतर भला कौन कर सकता है...❤ed it...👌
जवाब देंहटाएंआपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में सोमवार 30 मार्च, 2026 को लिंक की जाएगी .... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!
जवाब देंहटाएंWahhh
जवाब देंहटाएंबहुत सुन्दर
बहुत खूब नासवा जी
जवाब देंहटाएंवाह
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर
जवाब देंहटाएंcomprar carta
kup prawo jazdy
Comprar carta online
fuhrerschein kaufen
rijbewijs kopen online
Kopa kokot
Comprar patente
rijbewijs kopen online
koupit ridicsky prukaz online
kupić prawo jazdy
acheter permis de conduire en France
comprar carta
जवाब देंहटाएंComprar carta online
fuhrerschein kaufen
rijbewijs kopen online
mpu gutachten kaufen
Kopa kokot
Comprar patente
rijbewijs kopen online
koupit ridicsky prukaz online
acheter permis de conduire en France
सुंदर
जवाब देंहटाएं