दो पीठ के बीच का फांसला
मुड़ने के बाद ही पता चल पाता है
हालांकि इन्च भर दूरी
उम्र जितनी नहीं
पर सदियाँ गुज़र जाती हैं तय करने में
"ईगो" और "स्पोंड़ेलाइटिस"
कभी कभी एक से लगते हैं दोनों
फर्क महसूर नहीं होता
दर्द होता है मुड़ने पे
पर मुश्किल भी नहीं होती
जरूरी है बस एक ईमानदार कोशिश
दोनों तरफ से
एक ही समय,
एक ही ज़मीन पर
हाँ ... एक और बात
ज़रूरी है मुड़ने की इच्छा का होना
"ईगो" और "स्पोंड़ेलाइटिस"
जवाब देंहटाएंकभी कभी एक से लगते हैं दोनों
फर्क महसूर नहीं होता
बहुत खूब...लाजवाब तुलना । सच में मुड़ना ही दर्द देता है बाकी इतना कठिन काम है नहीं दोनों ही जगह । बहुत सुन्दर सृजन ।
आभार मीना जी ...
हटाएंलाजवाब
जवाब देंहटाएंशुक्रिया जी ...
हटाएंआपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" मंगलवार 23 जून 2020 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!
जवाब देंहटाएंबहुत आभार ...
हटाएंवाह!लाजवाब सृजन आदरणीय सर .
जवाब देंहटाएं"ईगो" और "स्पोंड़ेलाइटिस"
कभी कभी एक से लगते हैं दोनों
फर्क महसूर नहीं होता...कहने का तरीका बहुत पसंद आया .
सादर प्रणाम
शुक्रिया अनीता जी ...
हटाएंवाह!दिगंबर जी ,बहुत ही उम्दा । इगो ही स्पोंडिलोसिस का कारण है ...। पहले इगो के कारण अकडती है गर्दन और फिर धीरे-धीरे परिवर्तित हो जाती है स्पोन्डिलाइटिस में ।
जवाब देंहटाएंजी शुक्रिया ह्रदय से ...
हटाएंवाह ! बहुत उम्दा अंदाज़, सही पहचाना है आपने दोनों एक जैसे लगते ही नहीं एक ही हैं, मुड़ने की ख़्वाहिश पहले ही जगी रहे तो दर्द भी नहीं होगा
जवाब देंहटाएंह्रदय से आभार ...
हटाएंबेहद लाज़वाब सर, क्या तुलनात्मक रचनात्मकता है वाह।
जवाब देंहटाएंआभार श्वेता जी ...
हटाएं
जवाब देंहटाएंजरूरी है बस एक ईमानदार कोशिश
दोनों तरफ से
एक ही समय, एक ही ज़मीन पर
हाँ ... एक और बात
ज़रूरी है मुड़ने की इच्छा का होना
बहुत खूब ,बेहतरीन रचना अनोखे अंदाज में
बहुत आभार ज्योति जी ...
हटाएंआपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (24-06-2020) को "चर्चा मंच आपकी सृजनशीलता" (चर्चा अंक-3742) पर भी होगी।
जवाब देंहटाएं--
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ। सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
--
बहुत शुक्रिया ...
हटाएंबहुत सही तुलना की ।
जवाब देंहटाएंआभार रेखा जी ...
हटाएंईगो" और "स्पोंड़ेलाइटिस"
जवाब देंहटाएंकभी कभी एक से लगते हैं दोनों
फर्क महसूर नहीं होता
वाह
बहुत आभार ...
हटाएंवाह.... मुड़ने की इच्छा ही प्रमुख है.
जवाब देंहटाएंजी शुक्रिया राजा जी ...
हटाएंमुड़ना, झुकना कुछ लोगों की शान के खिलाफ होता है... टूट जाएँगे पर झुकेंगे नहीं !!! सार्थक तुलना।
जवाब देंहटाएंसही कहा है आपने ...
हटाएंवह कह देती कुछ भी कहती इतनी पीर नहीं होती,
जवाब देंहटाएंउसका मौन दर्द देता है जितना
बहुत आभार ...
हटाएंवाह बेहतरीन रचना आदरणीय
जवाब देंहटाएंबहुत शुक्रिया ...
हटाएंकितनी गहरी बात। दोनों में ही मुड़ने की इच्छा का होना ज़रूरी है। बीमारी के लिए व्यायाम जिससे गर्दन मुड़े और ईगो के लिए दोनों के मन में प्रेम ताकि मुड़ कर ज़िंदगी स्वीकारें। बहुत सुन्दर।
जवाब देंहटाएंबहुत आभार शबनम जी ...
हटाएंगज़ब की व्यंजनाएं होती है आपकी, गहन सोच गहन अभिव्यक्ति।
जवाब देंहटाएंशानदार सृजन।
शुक्रिया जी ...
हटाएंसटीक सार्थक सुंदर रचना
जवाब देंहटाएंशुक्रिया जी...
हटाएंहाँ ... एक और बात
जवाब देंहटाएंज़रूरी है मुड़ने की इच्छा का होना
यही एक माध्यम है जो सदियों पुराने दर्द को भी खत्म कर देता है ! गज़ब लेखनी है आपकी सर
आभार योगी जी ...
हटाएंईगो" और "स्पोंड़ेलाइटिस
जवाब देंहटाएंहम्म्म
क्या कहूं इस रचना के लिए, शब्द ही नहीं , दोनों के दर्द का दंश सहना बहुत कठिन है ,
मन के भाँवों का बहुत सटीकता और सार्थकता से उजागर किया हे आपने ,
हाँ ... एक और बात
ज़रूरी है मुड़ने की इच्छा का होना
बहुत अच्छी रचना
आभार ज़ोया जी ...
हटाएं"इन्च भर दूरी
जवाब देंहटाएंउम्र जितनी नहीं
पर सदियाँ गुज़र जाती हैं तय करने में"
इसीलिए हर रिश्ते की टूटने की वजह " ईगो "ही तो होती हैं।
बेहतरीन सृजन ,सादर नमन
बहुत आभार कामिनी जी ...
हटाएंजरूरी है बस एक ईमानदार कोशिश
जवाब देंहटाएंदोनों तरफ से
एक ही समय, एक ही ज़मीन पर
सही कहा दोनों एक साथ मुड़े पूरी इच्छा से तो पता भी न चले कि कभी अकड़ी भी थी गर्दन ईगो से...
स्पोंड़ेलाइटिस से तुलना!!!वाह!!!
लाजवाब सृजन हमेशा की तरह।
आभार सुधा जी ...
हटाएंकोशिश दोनों तरफ से हो ..बहुत सही . होता यही रहा है कि मुड़कर हम देखते रहे हैं . अब जरूरी है कि हम सामने वाले को भी मुड़ने बाध्य करें ..करना ही होगा .
जवाब देंहटाएंह्रदय से आभार आदरणीय ...
हटाएंबहुत बढ़िया
जवाब देंहटाएंशुक्रिया सर ...
हटाएंईगो और स्पॉन्डिलाइटिस एक से लगते हैं... बहुत सुन्दर वाकई इतना मुश्किल नहीं इच्छा शक्ति हो बस बिलकुल सही कहा आपने
जवाब देंहटाएंबहुत शुक्रिया आपका आदरणीय ...
हटाएंBD51BBCEFF
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