स्वप्न मेरे: आदाब उस ख़ुदा का आपसे मिला दिया ...

शनिवार, 28 फ़रवरी 2026

आदाब उस ख़ुदा का आपसे मिला दिया ...

आदाब उस ख़ुदा का आपसे मिला दिया.
सहरा की रेत पर हसीन गुल खिला दिया.

पत्थर गिरा के चाँद आसमान तोड़ के,
बरसों से सो रही थी झील फिर हिला दिया.

अपनी फटी सी शेरवानी कर के फिर रफू,
बेटे को ईद में नया कुर्ता सिला दिया. .

वो मय थी या के जाम इश्क के भरे हुए,
महफ़िल में आपने हुजूर क्या पिला दिया

बाजू में बैठना नहीं कुबूल आपको,
हम उठ गए तो क्यों उठे है ये गिला दिया.

खुद जिंदगी की ऐश की हर शै खरीद ली,
हम भी थे साथ हमको झुनझुना दिला दिया.

दामन छुड़ा लिया हमारा हाथ काट के,
हमको वफ़ा निभाने का ये सिलसिला दिया.

8 टिप्‍पणियां:

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  2. blogspot.in पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!

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  3. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में सोमवार 02 मार्च, 2026 को लिंक की जाएगी .... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!

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  4. यार यह शायरी दिल को छू जाती है। इसमें मोहब्बत, दर्द और खुद्दारी तीनों एक साथ चलते दिखते हैं। मुझे खासकर वह पंक्ति बहुत असर करती है जहाँ बाप अपनी फटी शेरवानी रफू करके बेटे के लिए कुर्ता सिलता है।

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