स्वप्न मेरे: आग़ाज़ है समर का तो अंजाम आएगा ...

शनिवार, 21 फ़रवरी 2026

आग़ाज़ है समर का तो अंजाम आएगा ...

पहले तो गुफ़्तगू में मेरा नाम आएगा.
फिर इसके बाद देखना इल्ज़ाम आएगा.

होगा मेरे ही नाम जो बे-नाम आएगा.
ख़ुशबू के साथ उड़ के जो पैग़ाम आएगा.

यादों का सिलसिला तो नहीं आता पूछ कर,
ऐसे ही दिल में तू कभी गुमनाम आएगा.

बीमार हैं जो इश्क़ में घबराइए नहीं,
बीमार हो के आपको आराम आएगा.

दिल से कभी ये बात मेरी आज़माइए,
राधा का नाम लीजिए घनश्याम आएगा.

मौसम बदल गया है फ़िज़ाओं का यक-ब-यक,
बादल के साथ फिर से मेरा नाम आएगा.

कुछ लम्हे तीरगी के है हिम्मत न हारिए,
लौटा नहीं जो घर पे सुबह, शाम आएगा.

देखा नहीं है हमने तो ऐसा कभी कहीं,
प्याला ज़हर का भेजिए तो जाम आएगा.

आती है रात, दिन भी निकलता है उसके बाद,
आग़ाज़ है समर का तो अंजाम आएगा.

6 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में सोमवार 23 फरवरी, 2026 को लिंक की जाएगी .... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!

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  2. बीमार हैं जो इश्क़ में घबराइए नहीं,
    बीमार हो के आपको आराम आएगा.
    वाह!!!!
    क्या बात👌👌
    दिल से कभी ये बात मेरी आज़माइए,
    राधा का नाम लीजिए घनश्याम आएगा.
    हमेशा की तरह बहुत ही लाजवाब।

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  3. कुछ लम्हे तीरगी के है हिम्मत न हारिए,
    लौटा नहीं जो घर पे सुबह, शाम आएगा.
    ...हर रात की सुबह होती है,,,बहुत खूब,,,

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  4. यादों का सिलसिला तो नहीं आता पूछ कर,
    ऐसे ही दिल में तू कभी गुमनाम आएगा.

    वाह!! बहुत ख़ूब, वैसे पूरी ग़ज़ल ही बेहतरीन है

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