ऐसे ही रहेगा वो मगर ठीक रहेगा.
गुस्से को झटक दोगे तो सर ठीक रहेगा.
देना है जो अन्जाम किसी बात को, अब दो,
कुछ देर दवाओं का असर ठीक रहेगा.
छत फूस की होगी तो उड़ा लेंगी हवाएँ,
इसको जो बदल दोगे तो घर ठीक रहेगा.
क्योंकि था पिता जी को मिला, आपका हक हो,
बेहतर तो है तन्हा ये शिखर ठीक रहेगा.
अब ये न करो वो न करो ठीक नहीं है,
क्या मन में किसी बात का डर ठीक रहेगा.
चाहत है के आँगन में चहकते हों परिन्दे,
फूलों से लदा एक शजर ठीक रहेगा.
मुश्किल ही सही वक़्त गुज़र जाएगा यूँ तो,
तुम साथ रहोगे तो सफ़र ठीक रहेगा.
तुम साथ रहोगे तो सफ़र ठीक रहेगा.
जवाब देंहटाएंWahhh ... बहुत सुन्दर
वाह
जवाब देंहटाएंतुम्हारे साथ रहने से सफ़र तो क्या पूरा जीवन ठीक रहेगा... वाह बहुत खूब
जवाब देंहटाएंमुग्ध सरस कृति
जवाब देंहटाएंअद्भुत पंक्तियाँ...बेहतरीन प्रायोगिक ग़ज़ल...👏👏👏
जवाब देंहटाएंआपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द सोमवार 08 दिसंबर , 2025 को लिंक की जाएगी .... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!
जवाब देंहटाएंबेहतरीन सृजन ।
जवाब देंहटाएंवाह, बहुत ही सुंदर रचना
जवाब देंहटाएंबहुत खूब!
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर
जवाब देंहटाएंवाह!! दिगंबर जी ,बहुत खूब !!
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