स्वप्न मेरे: तुम साथ रहोगे तो सफ़र ठीक रहेगा ...

शनिवार, 6 दिसंबर 2025

तुम साथ रहोगे तो सफ़र ठीक रहेगा ...

ऐसे ही रहेगा वो मगर ठीक रहेगा.
गुस्से को झटक दोगे तो सर ठीक रहेगा.

देना है जो अन्जाम किसी बात को, अब दो,
कुछ देर दवाओं का असर ठीक रहेगा.

छत फूस की होगी तो उड़ा लेंगी हवाएँ,
इसको जो बदल दोगे तो घर ठीक रहेगा.

क्योंकि था पिता जी को मिला, आपका हक हो,
बेहतर तो है तन्हा ये शिखर ठीक रहेगा.

अब ये न करो वो न करो ठीक नहीं है,
क्या मन में किसी बात का डर ठीक रहेगा.

चाहत है के आँगन में चहकते हों परिन्दे,
फूलों से लदा एक शजर ठीक रहेगा.

मुश्किल ही सही वक़्त गुज़र जाएगा यूँ तो,
तुम साथ रहोगे तो सफ़र ठीक रहेगा.

11 टिप्‍पणियां:

  1. तुम साथ रहोगे तो सफ़र ठीक रहेगा.
    Wahhh ... बहुत सुन्दर

    जवाब देंहटाएं
  2. तुम्हारे साथ रहने से सफ़र तो क्या पूरा जीवन ठीक रहेगा... वाह बहुत खूब

    जवाब देंहटाएं
  3. अद्भुत पंक्तियाँ...बेहतरीन प्रायोगिक ग़ज़ल...👏👏👏

    जवाब देंहटाएं
  4. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द सोमवार 08 दिसंबर , 2025 को लिंक की जाएगी .... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!

    जवाब देंहटाएं

आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है