स्वप्न मेरे: दुआ ...

शनिवार, 6 जनवरी 2024

दुआ ...

जिद्द है तुझे पाने की
पर दौड़ने नहीं देता वक़्त अपने से आगे
जबकि तू सवार रहती है पतंग के उस कोने पे
जो रहता है आसमान में, कट जाने से पहले तक

तेरे कटने का इंतज़ार मुझे मंज़ूर नहीं
दूसरी पतंगों से आँख-मिचौली मैं चाहता नहीं

(तेरी ऊंची उड़ान, हमेशा से मेरी चाहत जो रही है)

शायद ये डोर अब वक़्त के हाथों ठीक नहीं
उम्मीद का क़तरा जो बाकी है आँखों में अभी

पतंग के उसी कोने पे बैठ
दुआ करना तू मेरे हक़ में

सुना है दुनिया बनाने वाला
वहीं रहता है ऊपर आसमान में कहीं …
#जंगली_गुलाब

12 टिप्‍पणियां:

  1. वक्त बढ़ाता मुझको आगे , और हसरतें पीछे ...
    चाहत और इन्तज़ार पीड़ा देते हैं लेकिन किसी को थकने या हारने नहीं देते . .
    बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति

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  2. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में" सोमवार 08 जनवरी 2024 को लिंक की जाएगी ....  http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद! !

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  3. सुन्दर अभिव्यक्ति. नव वर्ष की मंगल कामनाएं.

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  4. पतंग के उसी कोने पे बैठ
    दुआ करना तू मेरे हक़ में

    सुना है दुनिया बनाने वाला
    वहीं रहता है ऊपर आसमान में कहीं …
    वाह !! बेहतरीन और लाजवाब भावाभिव्यक्ति । सादर वन्दे !

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  5. वाह नासवा जी, शानदार ल‍िखा...पतंग के उसी कोने पे बैठ
    दुआ करना तू मेरे हक़ में... ये मृगमरीच‍िका है ...वाह

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  6. दिल से निकली हर दुआ कुबूल होती है, सुंदर रचना !

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  7. तेरे कटने का इंतज़ार मुझे मंज़ूर नहीं
    दूसरी पतंगों से आँख-मिचौली मैं चाहता नहीं

    (तेरी ऊंची उड़ान, हमेशा से मेरी चाहत जो रही है)
    वाह!!!!
    बहुत ही खूबसूरत चाहत!!!
    क्या बात...
    बहुत ही लाजवाब।

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  8. बहुत सुंदर रचना... शुभकामनाएं ढ़ेर सारी

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  9. पतंग के उसी कोने पे बैठ
    दुआ करना तू मेरे हक़ में

    सुना है दुनिया बनाने वाला
    वहीं रहता है ऊपर आसमान में कहीं …शानदार काव्य !

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