स्वप्न मेरे: पतगं
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शनिवार, 6 जनवरी 2024

दुआ ...

जिद्द है तुझे पाने की
पर दौड़ने नहीं देता वक़्त अपने से आगे
जबकि तू सवार रहती है पतंग के उस कोने पे
जो रहता है आसमान में, कट जाने से पहले तक

तेरे कटने का इंतज़ार मुझे मंज़ूर नहीं
दूसरी पतंगों से आँख-मिचौली मैं चाहता नहीं

(तेरी ऊंची उड़ान, हमेशा से मेरी चाहत जो रही है)

शायद ये डोर अब वक़्त के हाथों ठीक नहीं
उम्मीद का क़तरा जो बाकी है आँखों में अभी

पतंग के उसी कोने पे बैठ
दुआ करना तू मेरे हक़ में

सुना है दुनिया बनाने वाला
वहीं रहता है ऊपर आसमान में कहीं …
#जंगली_गुलाब