स्वप्न मेरे: परवाज़ परिंदों की अभी बद-हवास है ...

शनिवार, 15 जनवरी 2022

परवाज़ परिंदों की अभी बद-हवास है ...

दो बूँद गिरा दे जो अभी उसके पास है,.
बादल से कहो आज मेरी छत उदास है.
 
तबका न कोई चैनो-अमन से है रह रहा,
सुनते हैं मगर देश में अपने विकास है.
 
ज़ख्मी है बदन साँस भी मद्धम सी चल रही,
टूटेगा मेरा होंसला उनको क़यास है.
 
था छेद मगर फिर भी किनारे पे आ लगी,
सागर से मेरी कश्ती का रिश्ता जो ख़ास है.
 
दीवार खड़ी कर दो चिरागों को घेर कर,
कुछ शोर हवाओं का मेरे आस पास है.
 
छिड़का है फिजाओं में लहू जिस्म काट कर,
तब जा के सवेरे का सिन्दूरी लिबास है.
 
कह दो की उड़ानों पे न कब्ज़ा किसी का हो, 
परवाज़ परिंदों की अभी बद-हवास है.

26 टिप्‍पणियां:

  1. तबका न कोई चैनो-अमन से है रह रहा,
    सुनते हैं मगर देश में अपने विकास है.

    कैसे हो अमन चैन जब नफरत है हर जगह
    दिखता नही अब किसी को कितना विकास है ।

    क्षमा सहित 🙏🙏🙏🙏
    पूरी ग़ज़ल कमाल की ।

    जवाब देंहटाएं
  2. आपकी लिखी रचना सोमवार. 17 जनवरी 2022 को
    पांच लिंकों का आनंद पर... साझा की गई है
    आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    सादर
    धन्यवाद।

    जवाब देंहटाएं
  3. दो बूँद गिरा दे जो अभी उसके पास है,.
    बादल से कहो आज मेरी छत उदास है.

    बहुत कोमल अहसास

    जवाब देंहटाएं
  4. सर बहुत सुंदर लाजवाब ग़ज़ल है 👏👏👏। सर आपने अपनी ग़ज़ल की हर एक पंक्ति को बहुत ही खूबसूरत अर्थपूर्ण शब्दों से सजाया है।

    जवाब देंहटाएं
  5. लाजवाब !!
    बहुत खूब आदरनीय नासवा जी ।हर शेर नायाब ।
    सादर

    जवाब देंहटाएं
  6. हर बार की तरह गूढ़ अर्थ समेटे उम्दा सृजन सामायिक परिस्थितियों से कलम रूबरू है ।
    साधुवाद।

    जवाब देंहटाएं
  7. था छेद मगर फिर भी किनारे पे आ लगी,
    सागर से मेरी कश्ती का रिश्ता जो ख़ास है.

    वाह!!!

    दीवार खड़ी कर दो चिरागों को घेर कर,
    कुछ शोर हवाओं का मेरे आस पास है.
    कमाल की गजल...
    बहुत ही लाजवाब
    एक से बढ़कर एक शेर
    वाह वाह!!!!
    👏👏👏🙏🙏🙏

    जवाब देंहटाएं
  8. सादर नमस्कार ,

    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (18-1-22) को "दीप तुम कब तक जलोगे ?" (चर्चा अंक 4313)पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है..आप की उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ायेगी .
    --
    कामिनी सिन्हा

    जवाब देंहटाएं
  9. बेहतरीन गज़ल सर,हर बंध बेहद गहन अर्थ लिए हुए।

    सादर।

    जवाब देंहटाएं
  10. थाछेद मगर फिर भी किनारे पे आ लगी,
    सागर से मेरी कश्ती का रिश्ता जो ख़ास है.
    दीवार खड़ी कर दो चिरागों को घेर कर,
    कुछ शोर हवाओं का मेरे आस पास है.
    क्या बात है। शानदार शेरों से सजी सुंदर प्रस्तुति दिगम्बर जी। हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई 🙏🙏

    जवाब देंहटाएं
  11. रचना बहुत अच्छी लगी.
    पर छत की उदासी नहीं !
    बादल जब तक छिडकाव करते
    दो-चार पतंगें उड़ा लेते !

    बहुत खूब !

    जवाब देंहटाएं
  12. वाह दिगंबर नासवा जी !
    परिंदों की उड़ान भले ही बदहवास हो लेकिन आपकी काव्यात्मक कल्पना की उड़ान तो बहुत ऊंची है !

    जवाब देंहटाएं
  13. बेहतरीन सुंदर भावपूर्ण रचना आदरणीय

    जवाब देंहटाएं
  14. कह दो की उड़ानों पे न कब्ज़ा किसी का हो,
    परवाज़ परिंदों की अभी बद-हवास है.
    बेहतरीन अशआरों में पिरोयी नायाब ग़ज़ल ।

    जवाब देंहटाएं

  15. For high-quality and durable printing solutions, many businesses turn to Zizo DTF Transfers. Their innovative transfer technology ensures vibrant colors and long-lasting results on various fabrics. Whether you're customizing apparel or creating promotional items, Zizo DTF Transfers offers reliable and efficient services. For more information, you can visit the website at any time.

    जवाब देंहटाएं

आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है