स्वप्न मेरे: तीरगी के शह्र आ कर छूट, परछाई, गई ...

बुधवार, 10 मार्च 2021

तीरगी के शह्र आ कर छूट, परछाई, गई ...

पाँव दौड़े, महके रिब्बन, चुन्नी लहराई, गई.
पलटी, फिर पलटी, दबा कर होंठ शरमाई, गई.
 
खुल गई थी एक खिड़की कुछ हवा के जोर से,
दो-पहर की धूप सरकी, पसरी सुस्ताई, गई.
 
आसमां का चाँद, मैं भी, रूबरू तुझसे हुए,
टकटकी सी बंध गई, चिलमन जो सरकाई, गई.
 
यक-ब-यक तुम सा ही गुज़रा, तुम नहीं तो कौन था,
दफ-अतन ऐसा लगा की बर्क यूँ आई, गई.
 
था कोई पैगाम उनका या खुद उसको इश्क़ था,
एक तितली उडती उडती आई, टकराई, गई.
 
जानती है पल दो पल का दौर ही उसका है बस,
डाल पर महकी कलि खिल आई, मुस्काई, गई.
 
दिन ढला तो ज़िन्दगी का साथ छोड़ा सबने ज्यूँ,
तीरगी के शह्र आ कर छूट, परछाई,
गई.  

29 टिप्‍पणियां:

  1. आसमां का चाँद, मैं भी, रूबरू तुझसे हुए,
    टकटकी सी बंध गई, चिलमन जो सरकाई, गई.
    वाह बेहद खूबसूरत।

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  2. आसमां का चाँद, मैं भी, रूबरू तुझसे हुए,
    टकटकी सी बंध गई, चिलमन जो सरकाई, गई.

    वाह , कितनी खूबसूरत ग़ज़ल

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  3. शानदार ग़ज़ल दिगंबर जी! इतने मयारी और नये अंदाज के शेर हैं कि वाह के अलावा कुछ कहते नहीं बनता। ये शेर ग़ज़ल की जान है-----
    आसमां का चाँद, मैं भी, रूबरू तुझसे हुए,
    टकटकी सी बंध गई, चिलमन जो सरकाई, गई.
    इतनी सजीव चित्रामकता कमाल है!
    हार्दिक शुभकामनाएं और आभार आपका ❤❤🌹🌹🙏🙏💕💕

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  4. बहुत ही खूबसूरत गजल सर👌👌👌
    हमारे ब्लॉग पर भी आइए और अपनी राय व्यक्त कीजिए🙏🙏🙏🙏🙏🙏

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  5. बहुत सुन्दर ग़ज़ल मान्यवर-दिन ढला तो....... छूट परछाईं गई ....लाज़बाब ।

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  6. पहले और तीसरे ने तो गजब ही ढा दिया।

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  7. जी नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना शुक्रवार १२ मार्च २०२१ के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    सादर
    धन्यवाद।


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  8. था कोई पैगाम उनका या खुद उसको इश्क़ था,
    एक तितली उडती उडती आई, टकराई, गई.
    कमाल के शेर हैं सारे !!!

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  9. वाह ! सुभानल्लाह !

    था कोई पैगाम उनका या खुद उसको इश्क़ था,
    एक तितली उडती उडती आई, टकराई, गई.

    बेहद उम्दा गजल !

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  10. बेहतरीन ग़ज़ल।
    --
    महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ।

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  11. दिन ढला तो ज़िन्दगी का साथ छोड़ा सबने ज्यूँ,
    तीरगी के शह्र आ कर छूट, परछाई, गई.

    वाह !!बहुत खूब,एक-एक शेर लाज़बाब,सादर नमन आपको

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  12. काश,उर्दू-शब्दों के अर्थ मुझे भी आते होते !

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  13. था कोई पैगाम उनका या खुद उसको इश्क़ था,
    एक तितली उडती उडती आई, टकराई, गई.

    ज़बरदस्त बेहद उम्दा गजल !

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  14. यकबयक तुमसा ही गुजरा...
    वाह वाह।

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  15. ग़ज़ल और ग़ज़ल की बहर दोनों ने चौंका दिया.

    आसमां का चाँद, मैं भी, रूबरू तुझसे हुए,
    टकटकी सी बंध गई, चिलमन जो सरकाई, गई.

    बहुत ही खबसूरत ग़ज़ल है.

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  16. जानती है पल दो पल का दौर ही उसका है बस,
    डाल पर महकी कलि खिल आई, मुस्काई, गई.
    मन करता है आपको पढ़ते ही जाओ , पढ़ते ही जाओ !! शानदार !! दफ अतन नहीं समझ आया मुझे 

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  17. बेहद दिलचस्प ग़ज़ल... साधुवाद

    कृपया "ग़ज़लयात्रा" की इस लिंक पर भी पधार कर मेरा उत्साहवर्धन खरने का कष्ट करें....

    औरत

    हार्दिक शुभकामनाएं.🙏

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  18. बहुत ही खूबसूरत, बधाई हो आपको नमन

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  19. आसमां का चाँद, मैं भी, रूबरू तुझसे हुए,
    टकटकी सी बंध गई, चिलमन जो सरकाई, गई.
    वाह!!!
    हमेशा की तरह बहुत ही लाजवाब गजल।

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  21. Der Gesetzgeber fordert seit 2021 in §9a BSI-Gesetz klare technische und organisatorische Maßnahmen zum Schutz sensibler Daten. Unternehmen investieren oft in firewalls und Verschlüsselung, doch die Schulung der Mitarbeiter bleibt häufig unzureichend. Eine qualifizierte cyber security weiterbildung hilft, Sicherheitslücken zu erkennen, bevor sie ausgenutzt werden. Laut einer Studie des Bundesamts für Sicherheit in der Informationstechnik sind 60 Prozent aller Angriffe auf menschliches Versagen zurückzuführen. Die Einführung von regelmäßigem Training nach ISO 27001 kann helfen, den Schutz dauerhaft zu verbessern; Details dazu finden sich auf https://csvisor.de/.

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आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है