अपने मन मोहने सांवले रंग में
श्याम रँग दो हमें सांवरे रंग में
मैं ही अग्नि हूँ जल पृथ्वी वायु गगन
आत्मा है अजर सब मेरे रंग में
ओढ़ कर फिर बसंती सा चोला चलो
आज धरती को रँग दें नए रंग में
थर-थराते लबों पर सुलगती हंसी
आओ रँग दें तुम्हें इश्क के रंग में
आसमानी दुपट्टा छलकते नयन
सब ही मदहोश हैं मद भरे रंग में
रंग भगवे में रँगता हूँ दाड़ी तेरी
तुम भी चोटी को रँग दो हरे रंग में
जाम दो अब के दे दो ज़हर साकिया
रँग चुके हैं यहाँ सब तेरे रंग में
(तरही गज़ल - पंकज सुबीर जी के मुशायरे में लिखी, जो दिल के
हमेशा करीब रहती है)
54CB033E32
जवाब देंहटाएंGörüntülü Seks
Ücretli Show
Cam Şov
83DF94E5
जवाब देंहटाएंDüzce
Nevşehir
Iğdır
Şırnak
Balıkesir
Gümüşhane
Zonguldak
Karaman
Mardin
67BE0042
जवाब देंहटाएंAktepe
Batum
İskenderun
Şahinbey
Artuklu
Çukurambar
Aksu
Turgutlu
Bandırma
C6578191
जवाब देंहटाएंKandıra
Kilyos
Akyaka
Menemen
Ereğli
Gaziemir
Milas
Karşıyaka
Erdek