स्वप्न मेरे: इम्तिहान
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बुधवार, 27 जनवरी 2021

कुछ हैं तेरी याद से जुड़े हुए ...

गिर गए हैं और कुछ खड़े हुए.
पेड़ आँधियों में हैं डटे हुए.
 
बंट रहा है मुफ़्त में ही कुछ कहीं,
आदमी पे आदमी चढ़े हुए.
 
दूध तो नसीब में नहीं है अब,
हम तो छाछ से भी हैं जले हुए.
 
रोज एक इम्तिहान है नया,
हम भी इस तरह से कुछ बड़े हुए.
 
बादलों का साथ दे रही हवा,
सामने हैं सूर्य के अड़े हुए.
 
चुप थे पैरवी में चश्म-दीद सब,
नोट कह रहे थे कुछ मुड़े हुए.
 
कुछ निकल गए बना के हम-सफ़र, 
कुछ हैं तेरी याद से जुड़े हुए.

मंगलवार, 5 जुलाई 2016

मंच पर आने से पहले बे-सुरा हो जाएगा ...

जी हजूरी कर सको तो सब हरा हो जाएगा
सच अगर बोला तो तीखा सा छुरा हो जाएगा

चल पड़ा हूँ मैं अँधेरी रात में थामें जिगर
एक जुगनू भी दिखा तो आसरा हो जाएगा

ये मेरी किस्मत है या मुझको हुनर आता नहीं
ठीक करने जब चला मैं कुछ बुरा हो जाएगा

इम्तिहानों की झड़ी ऐसी लगाई आपने
प्रेम में तपते हुए आशिक खरा हो जाएगा

या करो इकरार या फिर मार डालो इश्क में
तीर से नज़रों के आशिक अधमरा हो जाएगा

सीख ना पाए अगर तो शब्द लय सुर ताल छंद
 मंच पर आने से पहले बे-सुरा हो जाएगा