तू ही शब्द-अशब्द विशेष है, तू ही ब्रह्म-नाद में लेश है,
तू भवेश अशेष महेश है, तू ही सर्व-बंध-विमोचनम्.
तू ही डम-ड-डम, तू ही बम-ब-बम, तू त्रयम्बकम्, तू शिव:-शिवम् …
तू पुराण है तू नवीन है, तू प्रगट भी हो के विलीन है,
तू ही चिर-समाधि में लीन है, ये जगत भी तेरे अधीन है,
तू ही ज्ञान ध्यान प्रवीन है, तू ही शंभु-शंभु महेश्वरम्.
तू ही डम-ड-डम, तू ही बम-ब-बम, तू त्रयम्बकम्, तू शिव:-शिवम् …
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बहुत ही सम्मोहक स्तुति है सर।हम तो भाव विभोर हो गये। मन शांत हो गया। बहुत-बहुत अच्छा लगा।
जवाब देंहटाएंसर, स्वर किसने दिया हैं?
सादर।
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नमस्ते,
आपकी लिखी रचना शनिवार ३ दिसम्बर २०२६ के लिए साझा की गयी है
पांच लिंकों का आनंद पर...
आप भी सादर आमंत्रित हैं।
सादर
धन्यवाद।
नववर्ष मंगलमय हो।
क्षमा चाहेंगे,कृपया ३ दिसम्बर को ३ जनवरी पढ़े।
हटाएंसादर।
अति सुंदर... हर हर महादेव
जवाब देंहटाएंवाह
जवाब देंहटाएंवाह!!!!
जवाब देंहटाएंअत्यंत प्रभावी,
लाजवाब स्तुति 🙏🙏🙏
यह रचना पढ़ते ही मन ठहर सा जाता है। आप शिव को किसी मूर्ति या रूप में नहीं, बल्कि पूरे अस्तित्व में महसूस कराते हैं। हर पंक्ति में नाद, मौन, विनाश और सृजन साथ-साथ चलते दिखते हैं। आप शिव को दूर बैठा देव नहीं रहने देते, आप उसे सांस, ध्यान और चेतना बना देते हैं।
जवाब देंहटाएंसुंदर
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