स्वप्न मेरे: शिव स्तुति - 4

शनिवार, 24 जनवरी 2026

शिव स्तुति - 4

तेरे तन पे भस्म का आवरण, सभी भूत-अभूत रहें शरण
तू ही श्रृष्टिबीज का अँकुरण, तूशरीरमृत्यु का व्याकरण,
न तेरा रिसाव तेरा क्षरण, तू समाधि-वेध-सुरेशनम्,
तू ही डम-ड-डम, तू ही बम-ब-बम, तू त्रयम्बकम्, तू शिव:-शिवम्.


तेरा ज्ञान-चक्षु है भाल पर, ये मयंक-अर्ध कपाल पर,
रहें हस्ती-चर्म को डाल कर, ये बिराजें केहरी छाल पर,
जहाँ काल द्वार का पाल है, तू ही सर्व शक्तिनगेश्वरम्,
तू ही डम-ड-डम, तू ही बम-ब-बम, तू त्रयम्बकम्, तू शिव:-शिवम्.


ये सकल धरा के प्रयाण का, जो ये वीतराग प्रयत्न है,
ये जो कालकूट है कंठ में, यही क्षीर-सिंधु का रत्न है,
तू ही त्राण है तू ही यत्न है तू ही चंद्रमौलि-फणीश्वरम्,
तू ही डम-ड-डम, तू ही बम-ब-बम, तू त्रयम्बकम्, तू शिव:-शिवम्.

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