आँसुओं से
तर-ब-तर मासूम कन्धा रह गया
वक़्त की साँकल में
अटका इक दुपट्टा रह गया
मिल गया जो उसकी माया, जो
हुआ उसका करम
पा लिया तुझको तो
सब अपना पराया रह गया
आदतन बोला नहीं
मैं, रह गईं खामोश तुम
झूठ सच के बीच
उलझा एक लम्हा रह गया
छू के तुझको कुछ
कहा तितली ने जिसके कान में
इश्क़ में डूबा
हुआ वाहिद वो पत्ता रह गया
आपको देखा अचानक
बज उठी सीटी मेरी
उम्र तो बढ़ती रही
पर दिल में बच्चा रह गया
कर भी देता मैं
मुकम्मल शेर तेरे हुस्न पर
क्या कहूँ लट से
उलझ कर एक मिसरा रह गया
मैं भी कुछ जल्दी
में था, रुकने को तुम राज़ी न थीं
शाम का नीला समुन्दर
यूँ ही तन्हा रह गया
बोलना, बातें,
बहस, तकरार, झगड़ा, गुफ्तगू
इश्क़ की इस
दिल्लगी में अस्ल मुद्दा रह गया
कुछ कहा नज़रों ने, कुछ होठों ने, सच किसको कहूँ
यूँ शराफत सादगी
में पिस के बंदा रह गया
वाह !! बहुत ही बेहतरीन और लाजवाब !!
जवाब देंहटाएंबहुत आभार मीना जी ...
हटाएंलाजवाब
जवाब देंहटाएंशुकिया सर ...
हटाएंकर भी देता मैं मुकम्मल शेर तेरे हुस्न पर
जवाब देंहटाएंक्या कहूँ लट से उलझ कर एक मिसरा रह गया
वाह
शुक्रिया सर ...
हटाएंभई वाह ...
जवाब देंहटाएंशुक्रिया सतीश जी ...
हटाएं
जवाब देंहटाएंहर पंक्ति बहुत ही लाजवाब है वक़्त की साँकल में अटका एक दुपट्टा रह गया ।बहुत सुंदर ।
बहुत आभार आपका ...
हटाएंहर शेर बहुत शानदार .जानदार और लाज़बाब .
जवाब देंहटाएंआभार आपका आदरणीय ...
हटाएंबेहतरीन ग़ज़ल।
जवाब देंहटाएंआभार आपका शास्त्री जी ...
हटाएंसभी शेर बहुत खूबसूरत. क्या कह दिया ... वाह
जवाब देंहटाएंआँसुओं से तर-ब-तर मासूम कन्धा रह गया
वक़्त की साँकल में अटका इक दुपट्टा रह गया
आभार ह्रदय से ...
हटाएंआदतन बोला नहीं मैं, रह गईं खामोश तुम
जवाब देंहटाएंझूठ सच के बीच उलझा एक लम्हा रह गया
वाह!!!
हमेशा की तरह कमाल की गजल एक से बढ़कर एक शेर...
बहुत ही लाजवाब।
आभार सुधा जी ...
हटाएंबोलना, बातें, बहस, तकरार, झगड़ा, गुफ्तगू
जवाब देंहटाएंइश्क़ की इस दिल्लगी में अस्ल मुद्दा रह गया.... वाह! लाज़वाब!!!
आभार है आपका ...
हटाएंआदतन बोला नहीं मैं, रह गईं खामोश तुम
जवाब देंहटाएंझूठ सच के बीच उलझा एक लम्हा रह गया
वाह!!बेहतरीन ग़ज़ल आदरणीय।
शुक्रिया आराधना जी ...
हटाएंसादर नमस्कार,
जवाब देंहटाएंआपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा मंगलवार (२८-७-२०२०) को
"माटी के लाल" (चर्चा अंक 3776) पर भी होगी।आप भी सादर आमंत्रित है
आभार अओका कामिनी जी ...
हटाएंनमस्ते,
जवाब देंहटाएंआपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" में मंगलवार 28 जुलाई 2020 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!
आपकी रचना की पंक्ति-
"उम्र तो बढ़ती रही पर दिल में बच्चा रह गया"
हमारी प्रस्तुति का शीर्षक होगी।
बहुत आभार ...
हटाएंसभी में नयी ताज़गी भरा एहसास.
जवाब देंहटाएंबहुत आभार आदरणीय ...
हटाएंवाह !हमेशा की तरह लाजवाब ।
जवाब देंहटाएंशुक्रिया जी ...
हटाएंबहुत सुंंदर
जवाब देंहटाएंबहुत शुक्रिया मनोज जी ...
हटाएंइस बच्चे का बचपन संभाले रखना बहुत जरुरी है
जवाब देंहटाएंजी ... सही कह रहे हैं आप ... बहुत आभार ...
हटाएंवाह ,वाह!!बेहतरीन ,दिगंबर जी !
जवाब देंहटाएंआँसुओं से तर-ब-तर मासूम कंघा रह गया
वक्त की साँकल में अटका एक दुपट्टा रह गया ।
क्या बात है ..बहुत खूब!
आभार शुभा जी ...
हटाएंआपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (29-07-2020) को "कोरोना वार्तालाप" (चर्चा अंक-3777) पर भी होगी।
जवाब देंहटाएं--
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
--
बहुत शुक्रिया आपका ...
हटाएंआदतन बोला नहीं मैं, रह गईं खामोश तुम
जवाब देंहटाएंझूठ सच के बीच उलझा एक लम्हा रह गया
वाह
शुक्रिया सरिता जी ...
हटाएंवाह!!
जवाब देंहटाएंवक्त की सांकल में अटका दुपट्टा.. गज़ब अभिव्यक्ति होती है आपकी कहीं संवेदनाओं को कुरेदती कहीं उमर्दा और बेहतरीन अस्आर सार्थक सृजन।
बहुत आभार आदरणीय ...
हटाएंआ दिगंबर नासवा जी, नमस्ते ! एक बेहतरीन गजल की प्रस्तुति के लिए मेरा हार्दिक साधुवाद ! आपकी ही ये पंक्तियाँ लाजवाब हैं :
जवाब देंहटाएंकुछ कहा नज़रों ने, कुछ होठों ने, सच किसको कहूँ
यूँ शराफत सादगी में पिस के बंदा रह गया। --ब्रजेन्द्र नाथ
बहुत आभार आदरणीय ...
हटाएंआदतन बोला नहीं मैं, रह गईं खामोश तुम
जवाब देंहटाएंझूठ सच के बीच उलझा एक लम्हा रह गया... बहुत ही खूबसूरत नज़्म ... नासवा जी
बहुत शुक्रिया आदरणीय ...
हटाएंदिल को छू गयी यह ग़ज़ल । बेहतरीन प्रस्तुति । हार्दिक आभार और शुभकामनाएं ।
जवाब देंहटाएंहृदय से आभार आदरणीय ...
हटाएंबढ़ती उम्र के बच्चे के कारण ही दुपट्टा याद रह गया.
जवाब देंहटाएंबहुत सुन्दर रचना
की राजा साहब ... सही पकड़े हैं ...
हटाएंआभार आपका ...
सुन्दर प्रस्तुति
जवाब देंहटाएंबहुत शुक्रिया ...
हटाएंआदतन बोला नहीं मैं, रह गईं खामोश तुम
जवाब देंहटाएंझूठ सच के बीच उलझा एक लम्हा रह गया
वाह ! हर मिसरा कमाल का है ! कितना अच्छा लिखते हैं आप ! पढ़ कर उसकी खुमारी का उतरना मुश्किल हो जाता है !
बहुत आभार आदरणीय आपका ...
हटाएंबोलना, बातें, बहस, तकरार, झगड़ा, गुफ्तगू
जवाब देंहटाएंइश्क़ की इस दिल्लगी में अस्ल मुद्दा रह गया
बहुत सुंदर....
बहुत शुक्रिया विकास जी ...
हटाएंवाह!
जवाब देंहटाएंबहुत शानदार गज़ल।
बहुत आभार ...
हटाएंबहुत खूब
जवाब देंहटाएंबहुत शुक्रिया ...
हटाएंलाजवाब...लाजवाब...लाजवाब...
जवाब देंहटाएंबहुत आभार सर ...
हटाएंआदतन बोला नहीं मैं, रह गईं खामोश तुम
जवाब देंहटाएंझूठ सच के बीच उलझा एक लम्हा रह गया.....बस इतना ही कहूंगा !! शानदार
शुक्रिया योगी जी ...
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