प्रेम के कुछ दाग तन में रह गए
इसलिए हम अंजुमन में रह गए
सब तो डूबे चुस्कियों में और हम
नर्म सी तेरी छुवन में रह गए
चल दिए कुछ लोग रिश्ता तोड़ कर
कुछ निभाने की जतन में रह गए
छा गए किरदार कुछ आकाश पर
कुछ सिमट के पैरहन में रह गए
टूट कर सपने नहीं आए कभी
कुछ गुबारे भी गगन में रह गए
अहमियत रिश्तों की कुछ समझी नहीं
अपने अपने ही बदन में रह गए
उड़ गई आंधी घरोंदे तोड़ कर
सिरफिरे फिर भी चमन में रह गए
रेशमी धागे, मधुर
एहसास, पल
शर्ट के टूटे बटन में रह गए
खिडकियों से आ गई ताज़ा हवा
हम मगर फिर भी घुटन में रह गए
आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (02-04-2019) को "चेहरे पर लिखा अप्रैल फूल होता है" (चर्चा अंक-3293) पर भी होगी।
जवाब देंहटाएं--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
--
अन्तर्राष्ट्रीय मूख दिवस की
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
बहुत आभार शास्त्री जी ...
हटाएंवाहह्हह... वाहह्हह... बेहद शानदार गज़ल....
जवाब देंहटाएंहर शेर हर पंक्ति गज़ब की है...बेहद उम्दा सराहनीय सर....👌👌👌👌👌👏👏👏👏
बहुत आभार श्वेता जी ...
हटाएंआपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" मंगलवार 02 अप्रैल 2019 को साझा की गई है......... http://halchalwith5links.blogspot.in/ पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!
जवाब देंहटाएंआभार यशोदा जी ...
हटाएंबहुत सुन्दर
जवाब देंहटाएंसादर
शुक्रिया जी ...
हटाएंवाह सुंदर प्रस्तुति
जवाब देंहटाएंआभार ऋतू जी ...
हटाएंलाजवाब
जवाब देंहटाएंशुक्रिया सुशील जी ...
हटाएंटूट कर सपने नहीं आए कभी
जवाब देंहटाएंकुछ गुबारे भी गगन में रह गए
वाह बहुत सुंदर गज़ल
बहुत आभार आपका ...
हटाएंहर शेर सवा शेर।
जवाब देंहटाएंउम्दा बेहतरीन सृजन ।
शुक्रिया आपका ...
हटाएंवाह.. हर शेर बेहतरीन
जवाब देंहटाएंआभार पम्मी जी ...
हटाएंब्लॉग बुलेटिन की दिनांक 01/04/2019 की बुलेटिन, " मूर्ख दिवस विशेष - आप मूर्ख हैं या समझदार !?“ , में आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !
जवाब देंहटाएंशिवम जी शुक्रिया ...
हटाएंरेशमी धागे, मधुर एहसास, पल
जवाब देंहटाएंशर्ट के टूटे बटन में रह गए
अप्रतिम......., पूरी गज़ल लाजवाब...., इतनी सुन्दर कि जितना पढो हर बार मन को छूती हुई ही लगे ।
आभार है आपका मीना जी ...
हटाएंअश्क़, तड़पन, हिज्र तो सब ठीक है,
जवाब देंहटाएंतुम हमारी दास्ताँ क्यूँ कह गए?
बहुत अबह्र आपका गोपेश जी ... इस लाजवाब शेर के लिए ...
हटाएंएक शेर मेरी तरफ से आपके लिए ...
पेश करना था कोई किस्सा नया
यूँ ही अपनी दास्ताँ हम कह गए ...
व्व्व्वाह !
जवाब देंहटाएंचल दिए कुछ लोग रिश्ता तोड़ कर
कुछ निभाने की जतन में रह गए
छा गए किरदार कुछ आकाश पर
कुछ सिमट के पैरहन में रह गए
....लाजवाब आदरणीय
आभार रविन्द्र जी ...
हटाएंवाह, बहुत खूब
जवाब देंहटाएंशुक्रिया हिमकर जी ...
हटाएंवाह!बहुत ही लाजवाब गज़ल
जवाब देंहटाएंबहुत आभार रीना जी ...
हटाएंबेहतरीन कहन...!
जवाब देंहटाएंअच्छा लगा आपको पुनः ब्लॉग पर देख कर ...
हटाएंबहुत आभार आपका ...
वाह ! बहुत उम्दा पेशकश..दुनियावी प्रेम कितना भी कोमल अहसास से भर दे एक दिन उसके भी पार जाना होता है, वरना खिडकियों से आती हवाएं भी मन को सुकून नहीं देतीं, ताजगी का संबंध तो किसी अनाम के साथ ही है..
जवाब देंहटाएंबहुत आभार है आपका इस विस्तृत टिप्पणी के लिए ...
हटाएंवाह!!!
जवाब देंहटाएंएक और लाजवाब गजल बेहद उम्दा...
चल दिए कुछ लोग रिश्ता तोड़ कर
कुछ निभाने की जतन में रह गए
कमाल के शेर....एक से बढकर एक।
आभार सुधा जी ...
हटाएंचल दिए कुछ लोग रिश्ता तोड़ कर
जवाब देंहटाएंकुछ निभाने की जतन में रह गए
क्या बात है क्या बात है। हर पंक्ति हर शब्द दमदार। बधाई सर। सादर।
आभार विरेंद्र जी ..।
हटाएंसिरफिरे फिर भी चमन में रह गए ..आह हर शेर कितना कुछ समेटे .बहुत दिनों बाद देख सकी . सदा की तरह अभिभूत हूँ पढ़कर .
जवाब देंहटाएंये आपका विशेष स्नेह है ... आभारी हूँ आपका ...
हटाएंचल दिए कुछ लोग रिश्ता तोड़ कर
जवाब देंहटाएंकुछ निभाने की जतन में रह गए
...वाह...सभी अशआर अपने आप में बहुत कुछ कहते हुए... बहुत ख़ूबसूरत ग़ज़ल..
आभार कैलाश जी आपका ...
हटाएंहर शेर लाज़वाब है, वाह!
जवाब देंहटाएंशिक्रिया राकेश जी ...
हटाएं
जवाब देंहटाएंछा गए किरदार कुछ आकाश पर
कुछ सिमट के पैरहन में रह गए।
गजब की पंक्तियाँ हैं। हर शेर में एक नई बात दे देते हैं आप। बेहतरीन गजल। सादर।
आभार है आपका मीना जी ...
जवाब देंहटाएंबहुत खूब ,लाजबाब.. ,सादर नमस्कार आप को
जवाब देंहटाएंआभार आपका
हटाएंसब तो डूबे चुस्कियों में और हम
जवाब देंहटाएंनर्म सी तेरी छुवन में रह गए
चल दिए कुछ लोग रिश्ता तोड़ कर
कुछ निभाने की जतन में रह गए
छा गए किरदार कुछ आकाश पर
कुछ सिमट के पैरहन में रह गिए ..शायद ये ऐसे शब्द हैं जिनसे हर कोई अपने आपको आसानी से जोड़ सकता है ...हर किसी के अपने ..अपने दिल के शब्द ...शानदार
बहुत आभार योगी जी .।.
हटाएंप्रामाणिक अनुभूतियों की छुवन को जीती हुई ग़ज़ल.
जवाब देंहटाएंटूट कर सपने नहीं आए कभी
कुछ गुबारे भी गगन में रह गए
रेशमी धागे, मधुर एहसास, पल
शर्ट के टूटे बटन में रह गए
टूटे बटन में रह गए.......यह तो बहुत ही सुंदर है.
जी बहुत आभार आपका
हटाएंD2D67D58A9
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