स्वप्न मेरे: पागल दिल रुक जाओ, धक धक बंद करो ...

सोमवार, 19 नवंबर 2018

पागल दिल रुक जाओ, धक धक बंद करो ...

धूप न आए जेब में तब तक बंद करो
शाम को रोको दिन का फाटक बंद करो

बरसेंगे काले बादल जो ठहर गए
हवा से कह दो अपने नाटक बंद करो

प्रेम नहीं जो है मुझसे इस जीवन में
दिल के दरवाज़े पे दस्तक बंद करो  

जाना सच में अच्छी लगती हो सब से
दर्पण भी कहता है, अब शक बंद करो

गठ-बंधन के अभी इशारे आते हैं
जाना दिल पे अपना तो हक़ बंद करो

रोज़ चुनावों का ही मौसम रहता है
हे नेताओं अब तो बक बक बंद करो

बिन देखे तुम को वो ही यूँ चली गई 
पागल दिल रुक जाओ, धक धक बंद करो

1 टिप्पणी:


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