बरसों हो गए उस घर को छोड़े जो आज भी छाया रहता है मेरे ज़हन में,पिछले १५ वर्षों में जाने कितने हि घरों मैं रहा हूँ, पर कोई भी 'अपने आँगन" जैसा नही लगता,उसकी याद, उसकी खुशबू, वहां गुज़ारा एक एक लम्हा, आज भी मन को गुदगुदाता है|
यह कविता, बहुत पहले उस आँगन की याद में शुरू हुई, यादें जुड़ती गयीं, कविता बनती गयी,जाने कितने छंद इसमे और जुडेगें, क्यूंकि वो आँगन तो आज भी उतना ही ताज़ा है, जितना कल था|
यह कविता, बहुत पहले उस आँगन की याद में शुरू हुई, यादें जुड़ती गयीं, कविता बनती गयी,जाने कितने छंद इसमे और जुडेगें, क्यूंकि वो आँगन तो आज भी उतना ही ताज़ा है, जितना कल था|
आँगन में बिखरे
रहे, चूड़ी कंचे गीत
आँगन की सोगात ये, आँगन के हैं मीत
आँगन आँगन
तितलियाँ, उड़ती उड़ती जाएँ
इक आँगन का हाल
ये, दूजे से कह आएँ
बचपन फ़िर योवन
गया, जैसे कल कि बात
आँगन तब भी साथ
था, आँगन अब भी साथ
आँगन में रच बस
गयी, खट्टी मीठी याद
आँगन सब को पालता, ज्यों अपनी औलाद
तुलसी गमला मध्य
में, गोबर लीपा द्वार
शिव के सुंदर रूप
में, आँगन एक विचार
सुख दुःख छाया
धूप में, आँगन सदा बहार
आँगन में सिमटा
हुवा, छोटा सा संसार
कूंवा जोहड़ सब
यहाँ, फ़िर भी बाकी प्यास
बाट जोहता पथिक
कि, आँगन एक उदास
दुःख सुख छाया
धूप में, भटक गया परिवार
मौन तपस्वी सा
रहा, आँगन का व्यवहार
इक इक कर सब छोड़
गए, नाते रिश्तेदार
आँगन में खिलता
रहा, फ़िर भी सदाबहार
इक कोने में पेड़
है, दूजे में गोशाल
तीजे ठाकुरद्वार
है, आँगन के रखवाल
आँगन से बरसात है,
आँगन से है धूप
आँगन जैसे मोहिनी, शिव का सुंदर रूप
इक इक कर सब छोड़ गए, नाते रिश्तेदार
जवाब देंहटाएंआँगन में खिलता रहा, फ़िर भी सदाबहार
यही जीवन कि सच्चाई है ..वक्त बीत जाता है पर कुछ चीजे दिल दिमाग पर इसी तरह रहती है ..बढ़िया लगा यह
आँगन में बिखरे रहे, चूड़ी कंचे गीत
जवाब देंहटाएंआँगन कि सोगात ये,आँगन के ये मीत
आँगन आँगन तितलियाँ, उड़ती उड़ती जाएँ
इक आँगन का हाल ये, दूजे से कह आएँ
दुःख सुख पाप पुन्य में, भटक गया परिवार
मौन तपस्वी सा रहा, आँगन का व्यवहार
इक इक कर सब छोड़ गए, नाते रिश्तेदार
आँगन में खिलता रहा, फ़िर भी सदाबहार
वाह....दिगंबर जी वाह...एक से बढ़ कर एक सुंदर भाव पूर्ण दोहे....याद नहीं आता की कभी आँगन पर इतने बढ़िया दोहे कभी पढ़े हों....बधाई...
नीरज
सुंदर अभिव्यक्ति! कितना मधुर होता है, अतीत में वापस जा पाना!
जवाब देंहटाएंइस माहोल में अचानक भली सी लगी ......ये कविता
जवाब देंहटाएंदुःख सुख पाप पुन्य में, भटक गया परिवार
जवाब देंहटाएंमौन तपस्वी सा रहा, आँगन का व्यवहार
" इस कविता की सुन्दरता मुझे इन दो पंक्तियों मे नज़र आई है, आँगन का मौन तपस्वी व्यवहार अपने आप में एक अद्भुत भावः है , बेहद सुंदर.."
Regards
कुआँ जोहड़ सब यहाँ, फ़िर भी बाकी प्यास
जवाब देंहटाएंबाट जोहता पथिक की, आँगन एक उदास !
..............
क्या बात कही है आपने............
आपकी यह अद्वितीय रचना मन को छूकर विभोर कर गई.प्रशंशा को शब्द नही मेरे पास.बहुत बहुत बहुत ही सुंदर.
आँगन से बरसात है, आँगन से है धूप
जवाब देंहटाएंआँगन ब्रह्म विष्णू औ,शिव का सुंदर रूप
--सब कुछ समा गया एक इस बंद में पूरा आंगन!!!
बहुत खूब..दिगम्बर सेठ.
इस लेख को पढ़कर बहुत अच्छा लगा। आप रहस्यों के बारे में जान सकते है
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