स्वप्न मेरे

शनिवार, 10 जनवरी 2026

शिव स्तुति - 2

तू समाधि रूप में शंकरम् तू जगत स्वरूप शिवम् शिवम्
तू ही डम-ड-डम, तू ही बम-ब-बम, तू त्रयम्बकम्, तू शिव:-शिवम्

तू ही गीत-अगीत प्रगीत में, तू ही छन्द ताल पुनीत में
तू भविष्य में तू अतीत में, तू समय के साथ व्यतीत में
तू ही वाध यंत्र सुगीत में, तू मृदंग नृत्य है तांडवम्
तू ही डम-ड-डम, तू ही बम-ब-बम, तू त्रयम्बकम्, तू शिव:-शिवम्

तू विषय विकार से है परे, तू विरक्त हो के शशक्त है
तू परोक्ष है, तू समक्ष है, तू ही सर्व लोक में व्यक्त है
तू ही निर्विकार तटस्थ है, तू ही सर्वगोचर भव्यतम्
तू ही डम-ड-डम, तू ही बम-ब-बम, तू त्रयम्बकम्, तू शिव:-शिवम्

तू विराट है तू विशाल है,तू ही शून्य काल-अकाल है
तू मृदुल भी है तो कराल है,तू ही आदियोगी त्रिकाल है
तू ही ब्रह्म-नाद है ताल है, तू ही सर्व रूप चराचरम्
तू ही डम-ड-डम, तू ही बम-ब-बम, तू त्रयम्बकम्, तू शिव:-शिवम्

शुक्रवार, 2 जनवरी 2026

शिव स्तुति … यू ट्यूब लिंक

तू उदय न अस्त में शेष है, तू प्रलय विनाश प्रलेश है,
तू ही शब्द-अशब्द विशेष है, तू ही ब्रह्म-नाद में लेश है,
तू भवेश अशेष महेश है, तू ही सर्व-बंध-विमोचनम्.
तू ही डम-ड-डम, तू ही बम-ब-बम, तू त्रयम्बकम्, तू शिव:-शिवम् …

तू पुराण है तू नवीन है, तू प्रगट भी हो के विलीन है,
तू ही चिर-समाधि में लीन है, ये जगत भी तेरे अधीन है,
तू ही ज्ञान ध्यान प्रवीन है, तू ही शंभु-शंभु महेश्वरम्.
तू ही डम-ड-डम, तू ही बम-ब-बम, तू त्रयम्बकम्, तू शिव:-शिवम् …


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रविवार, 28 दिसंबर 2025

कुछ किताबों से भरा मासूम सा झोला गया …

धीरे-धीरे इन फ़िज़ाओं में ज़हर घोला गया.
और फिर धन्दा वहाँ हथियार का खोला गया.

प्यार का मौसम यदि रखना है क़ायम तो सुनें,
शब्द बोलें वो जिसे सो बार हो तोला गया.

एक परवाने की बातों से समझ आया यही,
मौत समझो जिस्म से जो प्यार का शोला गया.

आदमी की दोपहर उतनी ही तीखी हो गई,
ज़िन्दगी में रंग जितना धूप का घोला गया.

रौशनी करते हुए ही गुम फ़िज़ाओं में हुए,
जुगनुओं के जिस्म से जब रात का चोला गया.

इस कदर चालाकियाँ बिखरी हुई हैं हर तरफ़,
शब्द के भंडार में इक शब्द था भोला, गया.

घुस गई जब गंध वादी में नए बारूद की,
साथ खुश्बू के लरजती तितली का टोला गया.

आ गई दुनिया सिमिट के चिप के इस संसार में,
कुछ किताबों से भरा मासूम सा झोला गया.

शुक्रवार, 19 दिसंबर 2025

अर्थ गीता के जग में अटल हो गए …

पाँव कान्हा के छू कर विहल हो गए
माता यमुना के तेवर प्रबल हो गए

प्रभु सुदामा से मिल कर विकल हो गए
दो नयन रुक्मणी के सजल हो गए

कालिया पूतना सृष्टि लीला सकल
मोर-पंखी निरे कोतु-हल हो गए

तान छेड़ी मुरलिया की बेसुध किया
मंजरी ग्वाल-बाले अचल हो गए

सौ की मर्यादा टूटी सुदर्शन चला
पल वो शिशुपाल के काल-पल हो गए

रूह प्रारब्ध ही बस बचा किंतु तन
अग्नि, पृथ्वी, गगन, वायु, जल हो गए

कर के नारायणी कौरवों की तरफ़
कृष्ण ख़ुद पाण्डवों की बगल हो गए

इन्द्र के कोप से त्राण ब्रज का किया
तुंग गिरिराज भी तीर्थस्थल हो गए

सृष्टि मैं इष्ट मैं अंश सब में मेरा
श्याम वर्णी ये कह कर विरल हो गए

मथुरा-गोकुल से मथुरा से फिर द्वारका
युग के रणछोड़ योगी कुशल हो गए

राधे-राधे जपा हो गई तब कृपा
कुंज गलियन में जीवन सफल हो गए

द्वारिकाधीश जब से हुए सारथी
ख़ुद-ब-ख़ुद प्रश्न सम्पूर्ण हल हो गए

श्याम तेरी लगन और मीरा मगन
ख़ुद हला-हल तरल गंगा-जल हो गए

कर्म पथ, योग पथ, भक्ति पथ, धर्म क्या
अर्थ गीता के जग में अटल हो गए

शनिवार, 6 दिसंबर 2025

तुम साथ रहोगे तो सफ़र ठीक रहेगा ...

ऐसे ही रहेगा वो मगर ठीक रहेगा.
गुस्से को झटक दोगे तो सर ठीक रहेगा.

देना है जो अन्जाम किसी बात को, अब दो,
कुछ देर दवाओं का असर ठीक रहेगा.

छत फूस की होगी तो उड़ा लेंगी हवाएँ,
इसको जो बदल दोगे तो घर ठीक रहेगा.

क्योंकि था पिता जी को मिला, आपका हक हो,
बेहतर तो है तन्हा ये शिखर ठीक रहेगा.

अब ये न करो वो न करो ठीक नहीं है,
क्या मन में किसी बात का डर ठीक रहेगा.

चाहत है के आँगन में चहकते हों परिन्दे,
फूलों से लदा एक शजर ठीक रहेगा.

मुश्किल ही सही वक़्त गुज़र जाएगा यूँ तो,
तुम साथ रहोगे तो सफ़र ठीक रहेगा.