स्वप्न मेरे: कचरा ज़िन्दगी का ...

शनिवार, 25 मई 2024

कचरा ज़िन्दगी का ...

समय से पहले
समय से आगे निकल जाने का जूनून
पा लेने की जद्दोजहद

समेटता गया सब कुछ ज़िन्दगी की नाव में
समझ नहीं सका जरूरी है इतनी जगह का होना
की सहेज सकूँ लूटी हुयी पतंगों के माँझे
गुलाब के सूखे फूल, भीगते लम्हे के किस्से
खुशियों की गुल्लक, यादों के मर्तबान

आज उम्र के इस पड़ाव पर
जबकि इच्छाओं का अंत नज़र आने लगा है
कुछ नहीं बाकी सुविधाओं के अलावा, भौतिक सुख के इतर

ज़िन्दगी के लम्बे सफ़र में जरूरत होती है उन सब चीज़ों की
छोड़ देते हैं जिन्हें हम कचरे का ढेर समझ कर ...

11 टिप्‍पणियां:

  1. उम्र बढ़ती है और समझदारी भी :) बीमारी की तरह :) :)

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  2. जीवन की आपाधापी में अनमोल क्षण छूट जाते हैं हमारे हाथों से मगर फ़ुर्सत के समय में साकार हो उठते हमारी स्मृतियों में..,यही जीवन है । गहन और
    भावपूर्ण सृजन ।

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  3. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में" सोमवार 27 मई 2024 को लिंक की जाएगी ....  http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद! !

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  4. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में" सोमवार 27 मई 2024 को लिंक की जाएगी ....  http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद! !

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  5. सही कहा तब कहाँ फुर्सत थी इतनी... पर चार कदम पीछे लौटें तो कहीं ना कहीं राह देख रहीं हैं ये सारी स्मृतियाँ भी ...एक बार मिल लें इनसे तो लग रहा जैसे नींद से जागें हों...
    मनन करने योग्य लाजवाब सृजन ।

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  6. बहुत देर हो जाती है समझने में कि किन पलों को सहेजना था...कचरा इकट्ठा करने में उम्र लगा दी... अद्भुत रचना... 👏👏👏

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  7. वाक़ई यह राज बहुत देर से समझ में आता है, फिर भी जब जागो तभी सवेरा, जीवन तो हर पल में अनमोल है

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