स्वप्न मेरे: मेरी चाहत है बचपन की सभी गलियों से मिलने की ...

गुरुवार, 11 अगस्त 2016

मेरी चाहत है बचपन की सभी गलियों से मिलने की ...

कभी गोदी में छुपने की कभी घुटनों पे चलने की
मेरी चाहत है बचपन की सभी गलियों से मिलने की

सजाने को किसी की मांग में बस प्रेम काफी है
जरूरी तो नहीं सूरज के रंगों को पिघलने की

कहाँ कोई किसी का उम्र भर फिर साथ देता है
ज़रुरत है हमें तन्हाइयों से खुद निकलने की

वहां धरती का सीना चीर के सूरज निकलता है
जहां उम्मीद रहती है अँधेरी रात ढलने की

बड़ी मुश्किल से मिलती है किसी को प्रेम की हाला
मिली है गर नसीबों से जरूरत क्या संभलने की

उसे मिलना था खुद से खुद के अन्दर ही नहीं झाँका
खड़ा है मोड़ पे कबसे किसी शीशे से मिलने की  

2 टिप्‍पणियां:

  1. 4E8F21B31A
    Many online resources can help you enhance your skills and knowledge. For comprehensive guides and tutorials, you might want to visit the Website. It offers a variety of tools suitable for beginners and experts alike. Exploring this Website can significantly boost your learning experience. Always stay curious and keep exploring new platforms.

    जवाब देंहटाएं

आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है