स्वप्न मेरे: शिव स्तुति - 2

शनिवार, 10 जनवरी 2026

शिव स्तुति - 2

तू समाधि रूप में शंकरम् तू जगत स्वरूप शिवम् शिवम्
तू ही डम-ड-डम, तू ही बम-ब-बम, तू त्रयम्बकम्, तू शिव:-शिवम्

तू ही गीत-अगीत प्रगीत में, तू ही छन्द ताल पुनीत में
तू भविष्य में तू अतीत में, तू समय के साथ व्यतीत में
तू ही वाध यंत्र सुगीत में, तू मृदंग नृत्य है तांडवम्
तू ही डम-ड-डम, तू ही बम-ब-बम, तू त्रयम्बकम्, तू शिव:-शिवम्

तू विषय विकार से है परे, तू विरक्त हो के शशक्त है
तू परोक्ष है, तू समक्ष है, तू ही सर्व लोक में व्यक्त है
तू ही निर्विकार तटस्थ है, तू ही सर्वगोचर भव्यतम्
तू ही डम-ड-डम, तू ही बम-ब-बम, तू त्रयम्बकम्, तू शिव:-शिवम्

तू विराट है तू विशाल है,तू ही शून्य काल-अकाल है
तू मृदुल भी है तो कराल है,तू ही आदियोगी त्रिकाल है
तू ही ब्रह्म-नाद है ताल है, तू ही सर्व रूप चराचरम्
तू ही डम-ड-डम, तू ही बम-ब-बम, तू त्रयम्बकम्, तू शिव:-शिवम्

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