स्वप्न मेरे: नाचती लहरों से मैं ऊँचाइयाँ ले जाऊँगा ...

शुक्रवार, 12 फ़रवरी 2021

नाचती लहरों से मैं ऊँचाइयाँ ले जाऊँगा ...

आपका गम आपकी रुस्वाइयाँ ले जाऊँगा.
देखते ही देखते परछाइयाँ ले जाऊंगा .
 
आपने मुझको कभी माना नहीं अपना मगर,
ज़िन्दगी से आपकी कठिनाइयाँ ले जाऊँगा.
 
हाथ से छू कर कभी महसूस तो कर लो हमें, 
आपके सर की कसम तन्हाइयाँ ले जाऊँगा.
 
आपकी महफ़िल में आकर आपके पहलू से में, 
शोख नज़रों से सभी अमराइयाँ ले जाऊँगा.
 
प्रेम की बगिया कभी खिलने नहीं देते हें जो, 
वक़्त के पन्नों से वो सच्चाइयाँ ले जाऊँगा.
 
साहिलों पे डर जाना देख कर लहरों को तुम,
नाचती लहरों से मैं ऊँचाइयाँ ले जाऊँगा.

26 टिप्‍पणियां:

  1. वाह ! अपने प्रिय को आश्वस्त करती अनुपम रचना। हर शेर कमाल है।
    आपने मुझको कभी माना नहीं अपना मगर,
    ज़िन्दगी से आपकी कठिनाइयाँ ले जाऊँगा.

    हाथ से छू कर कभी महसूस तो कर लो हमें,
    आपके सर की कसम तन्हाइयाँ ले जाऊँगा.
    बहुत खूब !

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  2. ..काश कि ऐसा ही हो!! उत्साहित करती सुन्दर ग़ज़ल

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  3. नासवा जी बहुत कामयाब गजल है । बधाई

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  4. बहुत सुंदर नासवा जी आपकी हर ग़ज़ल बेमिसाल होती है।
    अप्रतिम।

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  5. आपने मुझको कभी माना नहीं अपना मगर,
    ज़िन्दगी से आपकी कठिनाइयाँ ले जाऊँगा.

    हाथ से छू कर कभी महसूस तो कर लो हमें,
    आपके सर की कसम तन्हाइयाँ ले जाऊँगा.

    वाह!!!
    क्या बात!!!
    कमाल की गजल....बहुत ही लाजवाब।

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  6. हमेशा की तरह , उम्दा और अलहदा। आपका अंदाज़ हुस्न है महाराज। ग़दर मचाए रहिये जी

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  7. आपका गम आपकी रुस्वाइयाँ ले जाऊँगा.
    देखते ही देखते परछाइयाँ ले जाऊंगा ....
    दो ही पंक्तियों में आप सब कुछ लेकर चले गए, ऐसा प्रतीत होता है। बहुत-बहुत धन्यवाद आदरणीय नसवा जी।

    बसंतोत्सव की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ आपका हार्दिक अभिनन्दन।

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  8. वाह..क्या बात है सर, क्या खूब लिखा है। आपको बहुत-बहुत बधाई।

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  9. "आप मुझको कभी माना नहीं अपना मगर, जिंदगी से आप की कठिनाइयाँ ले जाऊँगा।"- बहुत सुंदर। बहुत बढ़िया।

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  10. हमेशा की तरह बेहतरीन ग़ज़ल ।
    बस कोई तन्हाईयाँ ले जाने वाला हो तो ज़िन्दगी बसन्त है ।

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  11. प्रेम की बगिया कभी खिलने नहीं देते हें जो,
    वक़्त के पन्नों से वो सच्चाइयाँ ले जाऊँगा.

    बहुत खूब..

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  12. उत्साह जगाती बहुत सुंदर रचना।

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  13. हाथ से छू कर कभी महसूस तो कर लो हमें,
    आपके सर की कसम तन्हाइयाँ ले जाऊँगा.
    क्या बात
    कमाल की गजल....बहुत ही लाजवाब !

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  14. बहुत ही बेहतरीन है सभी लाईने ।

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  15. आपने मुझको कभी माना नहीं अपना मगर,
    ज़िन्दगी से आपकी कठिनाइयाँ ले जाऊँगा.
    बीबी को फिर से ये ग़ज़ल मैंने सुना दी तो फिर से कहीं वो मेरी "प्रेमिका " न बन जाए ....हाहाहा ! बहुत ही प्रेमपूर्ण !! सर जादू है आपकी लेखनी में जादू 

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