उन बुज़ुर्गों को कभी दिल से ख़फा मत करना
ग़र निभाने की चले बात मना मत करना.
दिल के रिश्तों में कभी जोड़-घटा मत करना.
रात आएगी तो इनका ही सहारा होगा,
भूल से दिन में चराग़ों से दगा मत करना.
माना वादी में अभी धूप की सरगोशी है,
तुम रज़ाई को मगर ख़ुद से जुदा मत करना.
कुछ गुनाहों का हमें हक़ मिला है कुदरत से,
बात अगर जान भी जाओ तो गिला मत करना.
दिल की बातों में कई राज़ छुपे होते हैं,
सुन के बातों को निगाहों से कहा मत करना.
है ये मुमकिन के सभी ख्वाब कभी हों पूरे ,
अपने सपनों को कभी खुद से फ़ना मत करना.
ज़िन्दगी अपनी लगा देते हैं जो शिद्दत से,
उन बुज़ुर्गों को कभी दिल से ख़फा मत करना.
लाजवाब
जवाब देंहटाएंबहुत खूब लिखा दिगंबर जी. ये पंक्तियाँ दिल बहुत करीब हैं-
जवाब देंहटाएंहै ये मुमकिन के सभी ख्वाब कभी हों पूरे ,
अपने सपनों को कभी खुद से फ़ना मत करना.
सुन्दर प्रस्तुति.
जवाब देंहटाएंबहुत अच्छी शायरी
जवाब देंहटाएंसदैव की भाँति
जवाब देंहटाएंसुन्दर ग़ज़ल प्रस्तुति।
सादर नमस्कार ,
जवाब देंहटाएंआपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (6-10-2020 ) को "उन बुज़ुर्गों को कभी दिल से ख़फा मत करना. "(चर्चा अंक - 3846) पर भी होगी,आप भी सादर आमंत्रित हैं।
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कामिनी सिन्हा
बहुत सुंदर शेर !!
जवाब देंहटाएंहमेशा से आपका लिखा बहुत सहज और approachable
होता है।
थैंक यू !
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वाह ! दिल के रिश्ते हों या चिराग दोनों ही जीवन के पथ पर उजाला फैलाते हैं, हर पंक्ति जीवन की सच्चाई की उजागर करती हुई !
जवाब देंहटाएंप्रेम, प्यार, वात्सल्य, त्याग, अनुभवों का जीता-जगता स्वरुप - बुजुर्ग
जवाब देंहटाएंज़िन्दगी अपनी लगा देते हैं जो शिद्दत से,
जवाब देंहटाएंउन बुज़ुर्गों को कभी दिल से ख़फा मत करना. ...लाजवाब !!
मन को छू गया यह शेर ...
जवाब देंहटाएंज़िन्दगी अपनी लगा देते हैं जो शिद्दत से,
उन बुज़ुर्गों को कभी दिल से ख़फा मत करना.
बहुत उम्दा और अर्थपूर्ण। बधाई।
लाजवाब
जवाब देंहटाएंहै ये मुमकिन के सभी ख्वाब कभी हों पूरे ,
जवाब देंहटाएंअपने सपनों को कभी खुद से फ़ना मत करना.
बेहतरीन सृजन ।
आ दिगंबर नासवा जी, आपके एक - एक शेर बहुत सुंदर बन पड़े हैं। यह शेर तो लाजवाब है:
जवाब देंहटाएंकुछ गुनाहों का हमें हक़ मिला है कुदरत से,
बात अगर जान भी जाओ तो गिला मत करना."
वाह! क्या बात है१--ब्रजेन्द्रनाथ
बेहतरीन सर सराहना से परे।
जवाब देंहटाएंसादर
रात आएगी तो इनका ही सहारा होगा,
जवाब देंहटाएंभूल से दिन में चराग़ों से दगा मत करना.
वाह!!!!
बहुत ही लाजवाब सृजन हमेशा की तरह...
एक से बढ़कर एक शेर।
दिगंबर भाई को हमेशा पढ़ कर आनंद आता है वो लिखते ही सबसे जुदा हैं... जिंदाबाद इस ग़ज़ल के लिए
जवाब देंहटाएं
जवाब देंहटाएंज़िन्दगी अपनी लगा देते हैं जो शिद्दत से,
उन बुज़ुर्गों को कभी दिल से ख़फा मत करना,,,,,,,जी सच है हमें हमेशा इन बातों का ध्यान रखना चाहिए बहुत सुंदर भावपूर्ण दिल को स्पर्श करती हुई रचना ।
बेहतरीन
जवाब देंहटाएंबहुत खूबसूरत ग़ज़ल ।।
जवाब देंहटाएं0702A49197
जवाब देंहटाएंkiralık hacker
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