दर्द जब कागज़ पर उतर आएगा
चेहरा तेरा लफ्जों में नज़र आएगा
अपने हाथों की लकीरों में न छुपाना मुझे
हाथ छूते हि तेरा चेहरा निखर आएगा
बदल गया है मौसम् महक सी आने लगी
मुझे लगता है जैसे तेरा शहर आएगा
तेरे पहलू में बैठूं तुझसे कोई बात करुँ
एक लम्हा ही सही पर ज़रूर आएगा
एक मुद्दत से आँखे बंद किए बैठा हूँ
कभी तो ख्वाब में मेरा हज़ूर आएगा
एक अद्बुत रचना।
जवाब देंहटाएंटिप्पणी से मुश्किल था बचना।
दिल को छूती रचना।
संजय भास्कर के ब्लॉग से आया हूँ
पढ़कर यह रचना
।
फिर तो मुश्किल ही था बचना
टिप्पणी से।
बदल गया है मौसम् महक सी आने लगी
जवाब देंहटाएंमुझे लगता है जैसे तेरा शहर आएगा
तेरे पहलू में बैठूं तुझसे कोई बात करुँ
एक लम्हा ही सही पर ज़रूर आएगा
बढ़िया गज़ल
अच्छी ,दिल को छूती हुई गज़ल !!
जवाब देंहटाएंअपने हाथों की लकीरों में न छुपाना मुझे
जवाब देंहटाएंहाथ छूते हि तेरा चेहरा निखर आएगा
बदल गया है मौसम् महक सी आने लगी
मुझे लगता है जैसे तेरा शहर आएगा
bahut sundar gazal... yah panktiyan to bas lajwab hi lagin...
सुन्दर रचना...
जवाब देंहटाएंएक मुद्दत से आँखे बंद किए बैठा हूँ
जवाब देंहटाएंकभी तो ख्वाब में मेरा हज़ूर आएगा
khoobsoorat ...komal ..ehsaas ...
एक मुद्दत से आँखे बंद किए बैठा हूँ
जवाब देंहटाएंकभी तो ख्वाब में मेरा हज़ूर आएगा
behad achchi lagi.....
एक मुद्दत से आँखे बंद किए बैठा हूँ
जवाब देंहटाएंकभी तो ख्वाब में मेरा हज़ूर आएगा
:-)
कल 05/03/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
जवाब देंहटाएंधन्यवाद!
एक अनोखा सोच |अच्छी रचना बधाई |
जवाब देंहटाएंआशा
अपने हाथों की लकीरों में न छुपाना मुझे
जवाब देंहटाएंहाथ छूते हि तेरा चेहरा निखर आएगा
वाह बेहद खूबसूरत एहसास ....
संवेदनशील रचना अभिवयक्ति.....
जवाब देंहटाएंवाह ||
जवाब देंहटाएंबहुत ही बढ़िया गजल...
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