धूप तब भी नहीं चुभी
की साया था तेरी घनी छाँव
का
मेरे आसमान पर
ओर धूप तेरे जाने के बाद भी
नहीं चुभी
की तेरी यादों की धुंध
बादलों की घनी छाँव बन के
डटी रही सूरज के आगे
जानता हूं
समय की बेलगाम रफ़्तार ने
सांसों के प्रवाह से
तुझे मुक्त कर दिया
पर मेरे वजूद में शामिल
तेरा अंश
मेरे रहते
आसान तो न होगा
उसे मुक्त करना ...